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Subhan Asad
ye saaniha bhi shab-e-hijr aa pada ham par
ye saaniha bhi shab-e-hijr aa pada ham par | ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर
- Subhan Asad
ये
सानिहा
भी
शब-ए-हिज्र
आ
पड़ा
हम
पर
तेरा
ख़्याल
तो
आया
तेरी
तलब
न
हुई
- Subhan Asad
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इस
सोच
का
क़ब्ज़ा
मेरे
इदराक
पे
होना
अफ़लाक
पे
होने
के
लिए
ख़ाक
पे
होना
दुनिया
मुझे
पूछे
कि
ये
ख़ुशबू
है
किधर
की
और
मेरा
ख़याल
आपकी
पोशाक
पे
होना
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Ahmad Abdullah
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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मैं
इस
ख़याल
से
जाते
हुए
उसे
न
मिला
कि
रोक
लें
न
कहीं
सामने
खड़े
आँसू
Jawwad Sheikh
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भुला
दिया
है
जो
तू
ने
तो
कुछ
मलाल
नहीं
कई
दिनों
से
मुझे
भी
तिरा
ख़याल
नहीं
Navin C. Chaturvedi
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मुसीबतों
में
तो
याद
करते
ही
हैं
किसी
को
ये
लोग
सारे
मगर
कभी
जो
सुकूँ
में
आए
ख़याल
मेरा
तो
लौट
आना
Hasan Raqim
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मेरा
ख़याल
तेरी
चुप्पियों
को
आता
है
तेरा
ख़याल
मेरी
हिचकियों
को
आता
है
Kumar Vishwas
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मरने
का
है
ख़याल
ना
जीने
की
आरज़ू
बस
है
मुझे
तो
वस्ल
के
मौसम
की
जुस्तजू
Muzammil Raza
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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अब
सुलगती
है
हथेली
तो
ख़याल
आता
है
वो
बदन
सिर्फ़
निहारा
भी
तो
जा
सकता
था
Ameer Imam
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उसने
ये
कहके
मुझे
छोड़
दिया
हाशिया
छोड़
दिया
जाता
है
Subhan Asad
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यही
तलब
है
जो
जीना
सिखाए
जाती
है
तुम्हारे
ख़्वाब
न
देखें
तो
कब
के
मर
जाएँ
Subhan Asad
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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आज
है
कुछ
सबब
आज
की
शब
न
जा
जान
है
ज़ेर-ए-लब
आज
की
शब
न
जा
क्या
पता
फिर
तिरे
वस्ल
की
साअतें
हूँ
कहाँ
कैसे
कब
आज
की
शब
न
जा
चाँद
क्या
फूल
क्या
शम्अ
क्या
रंग
क्या
हैं
परेशान
सब
आज
की
शब
न
जा
वक़्त
को
कैसे
तरतीब
देते
हैं
लोग
आ
सिखा
दे
ये
अब
आज
की
शब
न
जा
वो
सहर
भी
तुझी
से
सहर
थी
'असद'
शब
भी
तुम
से
है
शब
आज
की
शब
न
जा
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Subhan Asad
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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