aashiyaane ki jab bhi yaad aayi | आशियाने की जब भी याद आई

  - Sabir Abuhari
आशियानेकीजबभीयादआई
एकबिजलीसीदिलमेंलहराई
यूँँभीदेखागयाहैमहफ़िलमें
वोतमाशाथेहमतमाशाई
तेरेआँचलकाजिसपेसायाहो
उसगदापरनिसारदाराई
हमनेदामनहीजालियाउनका
लोगकरतेरहेजबीं-साई
माह-ओ-अंजुममेंलाला-ओ-गुलमें
हमकोतेरीझलकनज़रआई
दोस्तआएथेमुझकोसमझाने
हालदेखातोआँखभरआई
छागईंमस्तियाँफ़ज़ाओंमें
तेरेदामनकीजबहवाआई
जोमोहब्बतमेंमिटगया'साबिर'
उसनेमरकरभीज़िंदगीपाई
  - Sabir Abuhari
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