hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Nasir Kazmi
juda hue hain bahut log ek tum bhi sahi
juda hue hain bahut log ek tum bhi sahi | जुदा हुए हैं बहुत लोग एक तुम भी सही
- Nasir Kazmi
जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
- Nasir Kazmi
Download Sher Image
तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
Send
Download Image
44 Likes
कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
Send
Download Image
42 Likes
उसके
अच्छे
शे'र
नहीं
भाते
हमको
जो
अच्छा
इंसान
नहीं
बन
पाता
है
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
34 Likes
इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
Send
Download Image
29 Likes
कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
Send
Download Image
29 Likes
वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
Read Full
Dushyant Kumar
Send
Download Image
49 Likes
बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
Send
Download Image
27 Likes
रो
रहा
है
बशर
मगर
देखो
ज़िन्दगी
को
रफ़ू
नहीं
करता
Tarun Pandey
Send
Download Image
0 Likes
आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
Send
Download Image
28 Likes
ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
Read Full
Ashraf Ali
Send
Download Image
6 Likes
Read More
सफ़र-ए-मंज़िल-ए-शब
याद
नहीं
लोग
रुख़्सत
हुए
कब
याद
नहीं
अव्वलीं
क़ुर्ब
की
सरशारी
में
कितने
अरमाँ
थे
जो
अब
याद
नहीं
दिल
में
हर
वक़्त
चुभन
रहती
थी
थी
मुझे
किस
की
तलब
याद
नहीं
वो
सितारा
थी
कि
शबनम
थी
कि
फूल
एक
सूरत
थी
अजब
याद
नहीं
कैसी
वीराँ
है
गुज़र-गाह-ए-ख़याल
जब
से
वो
आरिज़
ओ
लब
याद
नहीं
भूलते
जाते
हैं
माज़ी
के
दयार
याद
आएँ
भी
तो
सब
याद
नहीं
ऐसा
उलझा
हूँ
ग़म-ए-दुनिया
में
एक
भी
ख़्वाब-ए-तरब
याद
नहीं
रिश्ता-ए-जाँ
था
कभी
जिस
का
ख़याल
उस
की
सूरत
भी
तो
अब
याद
नहीं
ये
हक़ीक़त
है
कि
अहबाब
को
हम
याद
ही
कब
थे
जो
अब
याद
नहीं
याद
है
सैर-ए-चराग़ाँ
'नासिर'
दिल
के
बुझने
का
सबब
याद
नहीं
Read Full
Nasir Kazmi
Download Image
0 Likes
जब
ज़रा
तेज़
हवा
होती
है
कैसी
सुनसान
फ़ज़ा
होती
है
हम
ने
देखे
हैं
वो
सन्नाटे
भी
जब
हर
इक
साँस
सदा
होती
है
दिल
का
ये
हाल
हुआ
तेरे
बाद
जैसे
वीरान
सरा
होती
है
रोना
आता
है
हमें
भी
लेकिन
इस
में
तौहीन-ए-वफ़ा
होती
है
मुँह-अँधेरे
कभी
उठ
कर
देखो
क्या
तर
ओ
ताज़ा
हवा
होती
है
अजनबी
ध्यान
की
हर
मौज
के
साथ
किस
क़दर
तेज़
हवा
होती
है
ग़म
के
बे-नूर
गुज़रगाहों
में
इक
किरन
ज़ौक़-फ़ज़ा
होती
है
ग़म-गुसार-ए-सफ़र-ए-राह-ए-वफ़ा
मिज़ा-ए-आबला-पा
होती
है
गुलशन-ए-फ़िक्र
की
मुँह-बंद
कली
शब-ए-महताब
में
वा
होती
है
जब
निकलती
है
निगार-ए-शब-ए-गुल
मुँह
पे
शबनम
की
रिदा
होती
है
हादसा
है
कि
ख़िज़ाँ
से
पहले
बू-ए-गुल
गुल
से
जुदा
होती
है
इक
नया
दौर
जनम
लेता
है
एक
तहज़ीब
फ़ना
होती
है
जब
कोई
ग़म
नहीं
होता
'नासिर'
बेकली
दिल
की
सिवा
होती
है
Read Full
Nasir Kazmi
Download Image
1 Like
वो
कोई
दोस्त
था
अच्छे
दिनों
का
जो
पिछली
रात
से
याद
आ
रहा
है
Nasir Kazmi
Send
Download Image
68 Likes
मुसलसल
बेकली
दिल
को
रही
है
मगर
जीने
की
सूरत
तो
रही
है
मैं
क्यूँँ
फिरता
हूँ
तन्हा
मारा
मारा
ये
बस्ती
चैन
से
क्यूँँ
सो
रही
है
चले
दिल
से
उम्मीदों
के
मुसाफ़िर
ये
नगरी
आज
ख़ाली
हो
रही
है
न
समझो
तुम
इसे
शोर-ए-बहाराँ
ख़िज़ाँ
पत्तों
में
छुप
कर
रो
रही
है
हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Read Full
Nasir Kazmi
Download Image
2 Likes
कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
Send
Download Image
21 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Diwangi Shayari
Teacher Shayari
Shikwa Shayari
Faasla Shayari
Neend Shayari