सफ़र-ए-मंज़िल-ए-शब याद नहीं

  - Nasir Kazmi
सफ़र-ए-मंज़िल-ए-शबयादनहीं
लोगरुख़्सतहुएकबयादनहीं
अव्वलींक़ुर्बकीसरशारीमें
कितनेअरमाँथेजोअबयादनहीं
दिलमेंहरवक़्तचुभनरहतीथी
थीमुझेकिसकीतलबयादनहीं
वोसिताराथीकिशबनमथीकिफूल
एकसूरतथीअजबयादनहीं
कैसीवीराँहैगुज़र-गाह-ए-ख़याल
जबसेवोआरिज़लबयादनहीं
भूलतेजातेहैंमाज़ीकेदयार
यादआएँभीतोसबयादनहीं
ऐसाउलझाहूँग़म-ए-दुनियामें
एकभीख़्वाब-ए-तरबयादनहीं
रिश्ता-ए-जाँथाकभीजिसकाख़याल
उसकीसूरतभीतोअबयादनहीं
येहक़ीक़तहैकिअहबाबकोहम
यादहीकबथेजोअबयादनहीं
यादहैसैर-ए-चराग़ाँ'नासिर'
दिलकेबुझनेकासबबयादनहीं
  - Nasir Kazmi
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