tire jalvo ka vo aalam nahin hai | तिरे जल्वों का वो आलम नहीं है

  - Sabir Abuhari
तिरेजल्वोंकावोआलमनहींहै
शुऊ'र-ए-दीदवर्नाकमनहींहै
निज़ाम-ए-ज़िंदगीहैमुंतशिरसा
मिज़ाज-ए-यारतोबरहमनहींहै
कभीलज़्ज़त-कश-ए-राहतहोंगे
मुयस्सरजिनकोतेराग़मनहींहै
दियाहैग़मज़मानेभरकामुझको
इनायतयेभीतेरीकमनहींहै
हमेंउम्मीदहोक्यूँकरकरमकी
सितमभीजबतिरापैहमनहींहै
नवाज़िशहोगईजिसपरजुनूँकी
उसेदुनियामेंकोईग़मनहींहै
मुयस्सरहैतिरीआँखोंकीमस्ती
मुझेसौदा-ए-जाम-ए-जमनहींहै
सलीक़ाहोअगरजीनेका'साबिर'
हयात-ए-चंद-रोज़ाकमनहींहै
  - Sabir Abuhari
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