kuchh gham ka gham hua na khushi ki khushi hui | कुछ ग़म का ग़म हुआ न ख़ुशी की ख़ुशी हुई

  - Sabir Abuhari
कुछग़मकाग़महुआख़ुशीकीख़ुशीहुई
किसराहत-ओ-सुकूँसेबसरज़िंदगीहुई
उसबे-नवागदाकोशहंशाहजानिए
जिसकोनसीबदौलत-ए-दीवानगीहुई
कैसेशब-ए-फ़िराक़कटीकुछपूछिए
इकदास्ताँहैरंज-ओ-अलमसेभरीहुई
सज्देकोसरझुकादियाअपनेहीपाँवपर
मुझकोजबअपनीज़ातसेकुछआगहीहुई
ख़ुदअपनेहुस्नकीभीवोताबलासका
जिसआदमीकेक़ल्बमेंकुछरौशनीहुई
साक़ीतिरेकरमकीतोकुछइंतिहानहीं
येऔरबातकममिरीतिश्नगीहुई
फ़ुर्क़तमेंभीनसीबहैमुझकोनशात-ए-क़ुर्ब
दिलमेंकिसीकीयादहैऐसीबसीहुई
'साबिर'ज़बाँपेहर्फ़-ए-शिकायतलासका
उसकीसरिश्तमेंहैक़नाअ'तभरीहुई
  - Sabir Abuhari
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