mohabbat phool bhi hai khaar bhi hai | मोहब्बत फूल भी है ख़ार भी है

  - Sabir Abuhari
मोहब्बतफूलभीहैख़ारभीहै
येवीरानाभीहैगुलज़ारभीहै
फ़रोज़ाँकरकेदेखेशम-ए-दिलको
पतंगापैकर-ए-अनवारभीहै
कमाल-ए-आगहीपरमरनेवालो
कमाल-ए-आगहीआज़ारभीहै
तमाशाबनगयाजिसकातहय्युर
नज़रवोलाएक़-ए-दीदारभीहै
गोलाखआरामहोकुंज-ए-क़फ़समें
असीरीरूहकाआज़ारभीहै
यहाँशाम-ओ-सहरबिकतेहैंयूसुफ़
येदुनियामिस्रकाबाज़ारभीहै
जोदिलहैज़ामिन-ए-मेहर-ओ-मोहब्बत
वहीदिलबानी-ए-पैकारभीहै
वो'साबिर'नामहैरिंदोंमेंजिसका
सुनाहैमहरम-ए-असरारभीहै
  - Sabir Abuhari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy