joo-e-kam-aab se ik tez sa jharna hua main | जू-ए-कम-आब से इक तेज़ सा झरना हुआ मैं

  - Rafiq Raaz
जू-ए-कम-आबसेइकतेज़साझरनाहुआमैं
तेरीजानिबहूँरवाँशोरमचाताहुआमैं
मुझसेख़ालीनहींअबएकभीज़र्राहैयहाँ
देखयेतंगज़मींऔरयेफैलाहुआमैं
देखकरवुसअत-ए-सहरा-ए-तपाँलर्ज़ांहूँ
साहिल-ए-दीदा-ए-नमनाकपेठहराहुआमैं
पा-ब-ज़ंजीरइधरतेज़हुआऔरउधर
ख़ाककेतख़्तपेसुलतानसाबैठाहुआमैं
कोईख़ुर्शीदसादुनियापेचमकताहुआतू
किसीदीवारसेसायासानिकलताहुआमैं
  - Rafiq Raaz
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