kurra-e-arz ko tareek banaa dena tha | कुर्रा-ए-अर्ज़ को तारीक बना देना था

  - Rafiq Raaz
कुर्रा-ए-अर्ज़कोतारीकबनादेनाथा
हिज्रकीशबमेंसितारोंकोबुझादेनाथा
कितनीदहशतहैमिरेशहरमेंसन्नाटेकी
नख़्ल-ए-आवाज़यहाँभीतोलगादेनाथा
तूकिमौजूदअगरमिस्ल-ए-हवासेहनमेंथा
शजर-ए-जामिद-ओ-साकितकोहिलादेनाथा
पुर-सुकूँकबसेमिरेदिलकाहैसहरा-ए-सुकूत
केइसमेंभीकभीहश्रउठादेनाथा
हुस्नकेमंज़र-ए-सफ़्फ़ाकनज़रआतेसाफ़
पर्दा-ए-ख़्वाबकोआँखोंसेहटादेनाथा
रंगकुछसुब्ह-ए-क़यामतकाअलगहीहोता
चेहरा-ए-मेहरसभीरंगउड़ादेनाथा
  - Rafiq Raaz
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