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Zubair Ali Tabish
hamne parche aansuon se bhar diye
hamne parche aansuon se bhar diye | हमने पर्चे आँसुओं से भर दिए
- Zubair Ali Tabish
हमने
पर्चे
आँसुओं
से
भर
दिए
और
तुमने
इतने
कम
नंबर
दिए
ऊंचे
नीचे
घर
थे
बस्ती
में
बहुत
जलजले
ने
सब
बराबर
कर
दिए
- Zubair Ali Tabish
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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रोज़
ढक
लेती
थी
नीला
जिस्म
अपना
शुक्र
है
आ
गई
बाहर
घर
की
बातें
Parul Singh "Noor"
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जो
बुजुर्गों
की
दु'आओं
के
दीयों
से
रौशन
रोज़
उस
घर
में
दीवाली
का
जश्न
होता
है
Pratap Somvanshi
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सारी
हिम्मत
टूट
गई,
बच्चों
से
ये
सुनकर
अब
भूखे
पेट
गुज़ारा
करने
की
हिम्मत
है
फूँका
घर,
भूखे
बच्चे,
टूटी
उम्मीदें,
अब
मुझ
में,
रस्सी
को
फंदा
करने
की
हिम्मत
है
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Aman G Mishra
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ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
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आप
क्या
आए
कि
रुख़्सत
सब
अंधेरे
हो
गए
इस
क़दर
घर
में
कभी
भी
रौशनी
देखी
न
थी
Hakeem Nasir
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वो
मेरे
घर
नहीं
आता
मैं
उस
के
घर
नहीं
जाता
मगर
इन
एहतियातों
से
त'अल्लुक़
मर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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लोग
कहते
हैं
कि
इस
खेल
में
सर
जाते
हैं
इश्क़
में
इतना
ख़सारा
है
तो
घर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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वो
पास
क्या
ज़रा
सा
मुस्कुरा
के
बैठ
गया
मैं
इस
मज़ाक़
को
दिल
से
लगा
के
बैठ
गया
दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
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Zubair Ali Tabish
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अपना
कंगन
समझ
रही
हो
क्या
और
कितना
घुमाओगी
मुझ
को
Zubair Ali Tabish
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ख़ाली
बैठे
हो
तो
इक
काम
मेरा
कर
दो
ना
मुझ
को
अच्छा
सा
कोई
ज़ख़्म
अदा
कर
दो
ना
ध्यान
से
पंछियो
को
देते
हो
दाना
पानी
इतने
अच्छे
हो
तो
पिंजरे
से
रिहा
कर
दो
ना
जब
क़रीब
आ
ही
गए
हो
तो
उदासी
कैसी
जब
दिया
दे
ही
रहे
हो
तो
जला
कर
दो
ना
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Zubair Ali Tabish
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इश्क़
में
ये
दावा
तो
नईं
है
मैं
ही
अव्वल
आऊँगा
लेकिन
इतना
कह
सकता
हूँ
अच्छे
नंबर
लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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भीड़
तो
ऊँचा
ही
सुनेगी
दोस्त
मेरी
आवाज़
गिर
पड़ेगी
दोस्त
मेरी
तक़दीर
तेरी
खिड़की
है
मेरी
तक़दीर
कब
खुलेगी
दोस्त
गाँव
मेरा
बहुत
ही
छोटा
है
तेरी
गाड़ी
नहीं
रुकेगी
दोस्त
दोस्ती
लफ़्ज़
में
ही
दो
है
दो
सिर्फ़
तेरी
नहीं
चलेगी
दोस्त
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Zubair Ali Tabish
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