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Zubair Ali Tabish
bheed to ooncha hi sunegi dost
bheed to ooncha hi sunegi dost | भीड़ तो ऊँचा ही सुनेगी दोस्त
- Zubair Ali Tabish
भीड़
तो
ऊँचा
ही
सुनेगी
दोस्त
मेरी
आवाज़
गिर
पड़ेगी
दोस्त
मेरी
तक़दीर
तेरी
खिड़की
है
मेरी
तक़दीर
कब
खुलेगी
दोस्त
गाँव
मेरा
बहुत
ही
छोटा
है
तेरी
गाड़ी
नहीं
रुकेगी
दोस्त
दोस्ती
लफ़्ज़
में
ही
दो
है
दो
सिर्फ़
तेरी
नहीं
चलेगी
दोस्त
- Zubair Ali Tabish
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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अपनी
कि़स्मत
में
ही
जब
इश्क़
नहीं
है
यारो
किसलिए
अश्क-ए-लहू
इश्क़
में
जाया
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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काश
तू
सब
याद
रखती
और
मैं
सब
भूल
जाता
हाँ
मगर
ऐसा
न
होना
भी
तो
क़िस्मत
थी
हमारी
shaan manral
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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आख़री
हिचकी
लेनी
है
अब
आ
जाओ
बा’द
में
तुम
को
कौन
बुलाने
वाला
है
Zubair Ali Tabish
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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उनके
गेसू
खुलें
तो
यार
बने
बात
मेरी
इक
रबर
बैंड
ने
जकड़ी
हुई
है
रात
मेरी
Zubair Ali Tabish
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मुरली
छूटी
शंख
बजा
रास
तजा
फिर
युद्ध
सजा
क्या
पीछे
क्या
आगे
है
सब
कुछ
राधे
राधे
है
Zubair Ali Tabish
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तेरे
ख़त
आज
लतीफ़ों
की
तरह
लगते
हैं
ख़ूब
हँसता
हूँ
जहाँ
लफ़्ज-ए-वफ़ा
आता
है
Zubair Ali Tabish
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