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Zubair Ali Tabish
tere khat aaj lateefon ki tarah lagte hain
tere khat aaj lateefon ki tarah lagte hain | तेरे ख़त आज लतीफ़ों की तरह लगते हैं
- Zubair Ali Tabish
तेरे
ख़त
आज
लतीफ़ों
की
तरह
लगते
हैं
ख़ूब
हँसता
हूँ
जहाँ
लफ़्ज-ए-वफ़ा
आता
है
- Zubair Ali Tabish
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ले
के
ख़त
उन
का
किया
ज़ब्त
बहुत
कुछ
लेकिन
थरथराते
हुए
हाथों
ने
भरम
खोल
दिया
Jigar Moradabadi
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'आशिक़
का
ख़त
है
पढ़ना
ज़रा
देख-भाल
के
काग़ज़
पे
रख
दिया
है
कलेजा
निकाल
के
LALA RAKHA RAM BARQ
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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तुम्हें
लौटा
रहा
हूँ
ख़त
तुम्हारे
कभी
तुम
क्या
थीं
ख़ुद
ही
देख
लेना
Gaurav Trivedi
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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तुम्हारा
दिल
है
बड़ा
सा
दरबा
जहाँँ
कबूतर
फड़क
रहे
हैं
कहाँँ
है
खोई
हमारी
चिट्ठी
कहाँँ
कबूतर
भटक
रहा
है
Anmol Mishra
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ज़बाने
दाग़
में
मैंने
उसे
लिखी
चिट्ठी
मिज़ाजे
मीर
में
उसने
मुझे
जवाब
दिया
Shadan Ahsan Marehrvi
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जो
उसने
लिक्खे
थे
ख़त
कापियों
में
छोड़
आए
हम
आज
उसको
बड़ी
उलझनों
में
छोड़
आए
Munawwar Rana
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हाकिम
को
इक
चिट्ठी
लिक्खो
सब
के
सब
और
उस
में
बस
इतना
लिखना
लानत
है
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Varun Anand
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यादों
की
रेल
आज
वहीं
आ
के
रुक
गई
खेले
थे
हम
जहाँ
कभी
पटरी
पे
बैठकर
Munawwar Rana
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उसने
खिड़की
से
चाँद
देखा
था
मैंने
खिड़की
में
चाँद
देखा
है
Zubair Ali Tabish
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चल
दिए
फेर
कर
नज़र
तुम
भी
ग़ैर
तो
ग़ैर
थे
मगर
तुम
भी
ये
गली
मेरे
दिलरुबा
की
है
दोस्तों
ख़ैरियत
इधर
तुम
भी
मुझपे
लोगों
के
साथ
हँसते
हो
लोग
रोएँगे
ख़ास
कर
तुम
भी
मुझको
ठुकरा
दिया
है
दुनिया
ने
मैं
तो
मर
जाऊँगा
अगर
तुम
भी
उसकी
गाड़ी
तो
जा
चुकी
'ताबिश'
अब
उठो
जाओ
अपने
घर
तुम
भी
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Zubair Ali Tabish
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इश्क़
में
ये
दावा
तो
नईं
है
मैं
ही
अव्वल
आऊँगा
लेकिन
इतना
कह
सकता
हूँ
अच्छे
नंबर
लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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चाँद
को
दामन
में
ला
कर
रख
दिया
उसने
मेरी
गोद
में
सर
रख
दिया
आँख
में
आँसू
है
किसके
नाम
के
किसने
कश्ती
में
समुंदर
रख
दिया
वो
बताने
लग
गया
मजबूरियाँ
और
फिर
हमने
रिसीवर
रख
दिया
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Zubair Ali Tabish
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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