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Zubair Ali Tabish
usne khidki se chaand dekha tha
usne khidki se chaand dekha tha | उसने खिड़की से चाँद देखा था
- Zubair Ali Tabish
उसने
खिड़की
से
चाँद
देखा
था
मैंने
खिड़की
में
चाँद
देखा
है
- Zubair Ali Tabish
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रोज़
तारों
को
नुमाइश
में
ख़लल
पड़ता
है
चाँद
पागल
है
अँधेरे
में
निकल
पड़ता
है
Rahat Indori
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यूँँ
न
कर
वस्ल
के
लम्हों
को
हवस
से
ता'बीर
चंद
पत्ते
ही
तो
तोड़े
हैं
शजर
से
मैं
ने
Khurram Afaq
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वो
अगर
हँस
दे
तो
मैं
लिख
दूँ
क़सीदे
चाँद
तक
इश्क़
करने
का
सलीक़ा
वो
सिखाती
है
बहुत
Amaan Pathan
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अमीर-ए-शहर
का
रिश्ते
में
कोई
कुछ
नहीं
लगता
ग़रीबी
चाँद
को
भी
अपना
मामा
मान
लेती
है
Munawwar Rana
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चाँद
को
दूरबीन
से
देखूँ
शाइरों
का
ये
काम
थोड़ी
है
Saarthi Baidyanath
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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ईद
के
बा'द
वो
मिलने
के
लिए
आए
हैं
ईद
का
चाँद
नज़र
आने
लगा
ईद
के
बा'द
Unknown
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तरीक़े
और
भी
हैं
इस
तरह
परखा
नहीं
जाता
चराग़ों
को
हवा
के
सामने
रक्खा
नहीं
जाता
मोहब्बत
फ़ैसला
करती
है
पहले
चंद
लम्हों
में
जहाँ
पर
इश्क़
होता
है
वहाँ
सोचा
नहीं
जाता
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Abrar Kashif
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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मुंतज़िर
हूँ
कि
सितारों
की
ज़रा
आँख
लगे
चाँद
को
छत
पे
बुला
लूँगा
इशारा
कर
के
Rahat Indori
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बैठे-बैठे
इक
दम
से
चौंकाती
है
याद
तिरी
कब
दस्तक
दे
कर
आती
है
तितली
के
जैसी
है
मेरी
हर
ख़्वाहिश
हाथ
लगाने
से
पहले
उड़
जाती
है
मेरे
सज्दे
राज़
नहीं
रहने
वाले
उस
की
चौखट
माथे
को
चमकाती
है
इश्क़
में
जितना
बहको
उतना
ही
अच्छा
ये
गुमराही
मंज़िल
तक
पहुँचाती
है
पहली
पहली
बार
अजब
सा
लगता
है
धीरे
धीरे
आदत
सी
हो
जाती
है
तुम
उस
को
भी
समझा
कर
पछताओगे
वो
भी
मेरे
ही
जैसी
जज़्बाती
है
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Zubair Ali Tabish
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इस
दर
का
हो
या
उस
दर
का
हर
पत्थर
पत्थर
है
लेकिन
कुछ
ने
मेरा
सर
फोड़ा
हैं
कुछ
पर
मैं
ने
सर
फोड़ा
है
Zubair Ali Tabish
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चल
दिए
फेर
कर
नज़र
तुम
भी
ग़ैर
तो
ग़ैर
थे
मगर
तुम
भी
ये
गली
मेरे
दिलरुबा
की
है
दोस्तों
ख़ैरियत
इधर
तुम
भी
मुझपे
लोगों
के
साथ
हँसते
हो
लोग
रोएँगे
ख़ास
कर
तुम
भी
मुझको
ठुकरा
दिया
है
दुनिया
ने
मैं
तो
मर
जाऊँगा
अगर
तुम
भी
उसकी
गाड़ी
तो
जा
चुकी
'ताबिश'
अब
उठो
जाओ
अपने
घर
तुम
भी
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Zubair Ali Tabish
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तेरे
ख़त
आज
लतीफ़ों
की
तरह
लगते
हैं
ख़ूब
हँसता
हूँ
जहाँ
लफ़्ज-ए-वफ़ा
आता
है
Zubair Ali Tabish
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चाहत
में
मर
जाने
वाली
लड़की
हो
तुम
सचमुच
अफ़साने
वाली
लड़की
हो
आख़िरी
बैंच
पे
बैठने
वाला
लड़का
मैं
जाओ
तुम
अव्वल
आने
वाली
लड़की
हो
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Zubair Ali Tabish
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