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Khurram Afaq
yuñ na kar vasl ke lamhon ko havas se taabeer
yuñ na kar vasl ke lamhon ko havas se taabeer | यूँँ न कर वस्ल के लम्हों को हवस से ता'बीर
- Khurram Afaq
यूँँ
न
कर
वस्ल
के
लम्हों
को
हवस
से
ता'बीर
चंद
पत्ते
ही
तो
तोड़े
हैं
शजर
से
मैं
ने
- Khurram Afaq
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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ये
किस
ने
बाग़
से
उस
शख़्स
को
बुला
लिया
है
परिंद
उड़
गए
पेड़ों
ने
मुँह
बना
लिया
है
उसे
पता
था
मैं
छूने
में
वक़्त
लेता
हूँ
सो
उस
ने
वस्ल
का
दौरानिया
बढ़ा
लिया
है
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Tehzeeb Hafi
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आप
तो
मुँह
फेर
कर
कहते
हैं
आने
के
लिए
वस्ल
का
वा'दा
ज़रा
आँखें
मिला
कर
कीजिए
Lala Madhav Ram Jauhar
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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बिछड़
के
तुझ
सेे
न
देखा
गया
किसी
का
मिलाप
उड़ा
दिए
हैं
परिंदे
शजर
पे
बैठे
हुए
Adeem Hashmi
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अब
के
हम
तर्क-ए-रसूमात
करके
देखते
हैं
बीच
वालों
के
बिना
बात
करके
देखते
हैं
इस
सेे
पहले
कि
कोई
फ़ैसला
तलवार
करे
आख़िरी
बार
मुलाक़ात
करके
देखते
हैं
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Abrar Kashif
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चले
भी
आओ
भुला
कर
सभी
गिले-शिकवे
बरसना
चाहिए
होली
के
दिन
विसाल
का
रंग
Azhar Iqbal
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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इक
रात
उस
ने
चंद
सितारे
बुझा
दिए
उस
को
लगा
था
कोई
उन्हें
गिन
नहीं
रहा
Khurram Afaq
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अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
असासो
के
नए
हक़दार
पैदा
हो
रहे
हैं
वसीयत
इसलिए
जल्दी
लिखी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
सवाली
इसलिए
चुप
चाप
रुख़्सत
हो
रहे
हैं
तेरी
सूरत
बा-आसानी
पढ़ी
जाने
लगी
है
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Khurram Afaq
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पहले
ये
रब्त
मेरी
ज़रूरत
बनाओगे
और
फिर
कहोगे
राब्ता
मुमकिन
नहीं
रहा
Khurram Afaq
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किसी
तरह
सँभल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
कि
बह
रहा
हूँ
चल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
गले
लगा
ऐ
मौसमों
के
देवता
बदल
मुझे
बदल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
ये
सुख
भी
है
कि
तेरे
ताक़चे
में
हूँ
ये
दुख
भी
है
कि
जल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
सवाल
पूछने
लगे
हैं
रास्ते
सफ़र
पे
क्यूँँ
निकल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
तुलूअ
हो
रहा
हूँ
दूसरी
तरफ़
उदास
मत
हो
ढल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
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Khurram Afaq
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ये
रख
रखाव
कभी
ख़त्म
होने
वाला
नहीं
बिछड़ते
वक़्त
भी
तुझको
गुलाब
दूँगा
मैं
Khurram Afaq
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