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Zubair Ali Tabish
aakhri hichki leni hai ab aa jaao
aakhri hichki leni hai ab aa jaao | आख़री हिचकी लेनी है अब आ जाओ
- Zubair Ali Tabish
आख़री
हिचकी
लेनी
है
अब
आ
जाओ
बा’द
में
तुम
को
कौन
बुलाने
वाला
है
- Zubair Ali Tabish
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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इस
ज़माने
को
ज़माने
की
अदा
आती
है
और
इक
हम
है
हमें
सिर्फ़
वफ़ा
आती
है
Zubair Ali Tabish
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कोरे
काग़ज़
पर
रो
रहे
हो
तुम
मैं
तो
समझा
पढ़े
लिखे
हो
तुम
क्या
कहा
मुझ
सेे
दूर
जाना
है
इसका
मतलब
है
जा
चुके
हो
तुम
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Zubair Ali Tabish
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तुम्हारे
ग़म
से
तौबा
कर
रहा
हूँ
तअ'ज्जुब
है
मैं
ऐसा
कर
रहा
हूँ
है
अपने
हाथ
में
अपना
गिरेबाँ
न
जाने
किस
से
झगड़ा
कर
रहा
हूँ
बहुत
से
बंद
ताले
खुल
रहे
हैं
तिरे
सब
ख़त
इकट्ठा
कर
रहा
हूँ
कोई
तितली
निशाने
पर
नहीं
है
मैं
बस
रंगों
का
पीछा
कर
रहा
हूँ
मैं
रस्मन
कह
रहा
हूँ
फिर
मिलेंगे
ये
मत
समझो
कि
वा'दा
कर
रहा
हूँ
मिरे
अहबाब
सारे
शहर
में
हैं
मैं
अपने
गाँव
में
क्या
कर
रहा
हूँ
मिरी
हर
इक
ग़ज़ल
असली
है
साहब
कई
बरसों
से
धंदा
कर
रहा
हूँ
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Zubair Ali Tabish
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