tumhaare gham se tauba kar raha hooñ | तुम्हारे ग़म से तौबा कर रहा हूँ

  - Zubair Ali Tabish
तुम्हारेग़मसेतौबाकररहाहूँ
तअ'ज्जुबहैमैंऐसाकररहाहूँ
हैअपनेहाथमेंअपनागिरेबाँ
जानेकिससेझगड़ाकररहाहूँ
बहुतसेबंदतालेखुलरहेहैं
तिरेसबख़तइकट्ठाकररहाहूँ
कोईतितलीनिशानेपरनहींहै
मैंबसरंगोंकापीछाकररहाहूँ
मैंरस्मनकहरहाहूँफिरमिलेंगे
येमतसमझोकिवा'दाकररहाहूँ
मिरेअहबाबसारेशहरमेंहैं
मैंअपनेगाँवमेंक्याकररहाहूँ
मिरीहरइकग़ज़लअसलीहैसाहब
कईबरसोंसेधंदाकररहाहूँ
  - Zubair Ali Tabish
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