tamaam roo-e-zameen par sukoot chaaya tha | तमाम रू-ए-ज़मीं पर सुकूत छाया था

  - Rafiq Raaz
तमामरू-ए-ज़मींपरसुकूतछायाथा
नुज़ूलकैसीक़यामतकाहोनेवालाथा
यहाँतोआगउगलतीहैयेज़मींहरसू
वोएकअब्रकापाराकहाँपेबरसाथा
बसएकबारहुआथावजूदकाएहसास
बसएकबारदरीचेसेउसनेझाँकाथा
अभीडसागयाथायेजिस्मतपताहुआ
अभीख़ज़ीना-ए-मख़्फ़ीपेसाँपसोयाथा
सफ़रमेंसरपेतिरीधुनतोथीसवारमगर
निगाहमेंकोईमंज़िलकोईरस्ताथा
येक़तराबहर-ए-मआनीहैमौजज़नजिसमें
क़लमकीनोकसेपहलेकभीटपकाथा
  - Rafiq Raaz
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