ajeeb KHaamushi hai ghul machaati rahtii hai | अजीब ख़ामुशी है ग़ुल मचाती रहती है

  - Rafiq Raaz
अजीबख़ामुशीहैग़ुलमचातीरहतीहै
येआसमानहीसरपरउठातीरहतीहै
कियाहैइश्क़तोसाबित-क़दमभीरहनासीख
मियाँयेहिज्रकीआफ़ततोआतीरहतीहै
येजोहैआजख़राबाकभीचमनथाक्या
यहाँतोएकमगसभिनभिनातीरहतीहै
डरोनहींयेकोईसाँपज़ेर-ए-काहनहीं
हवाहैऔरवहीसरसरातीरहतीहै
मिरेहीवास्तेमंज़रज़ुहूरकरतेहैं
मिरीहीआँखयहाँजगमगातीरहतीहै
हवाअगरचेबहुततेज़हैमगरफिरभी
मैंख़ाकहूँयेमिरेकामआतीरहतीहै
येकैसीचश्म-ए-तख़य्युलहैऊँघतीभीनहीं
अजीबरंगकेमंज़रबनातीरहतीहै
वोइकनिगाहभीनेज़ेसेकमनहींयानी
हमारेख़ून-ए-जिगरमेंनहातीरहतीहै
क़दमभीख़ाकपेकरतेहैंकुछकुछतहरीर
हवाकीमौजभीउसकोमिटातीरहतीहै
  - Rafiq Raaz
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