abr hooñ aur barsne ko bhi taiyyaar hooñ main | अब्र हूँ और बरसने को भी तय्यार हूँ मैं

  - Rafiq Raaz
अब्रहूँऔरबरसनेकोभीतय्यारहूँमैं
तुझकोसैराबकरूँँगाकिधुआँ-धारहूँमैं
अबतोकुछऔरहीख़तरातसेदो-चारहूँमैं
अपनेहीसरपेलटकतीहुईतलवारहूँमैं
तबमैंइकआँखथाजबतोकोईमंज़रभीथा
आजतस्वीरहैतोनक़्श-ब-दीवारहूँमैं
हिज्रकेबादकेमंज़रकाकिनायाहूँकोई
इकधुआँसापस-ए-दीवार-ए-शब-ए-तारहूँमैं
मेरासरमायातोबसमंज़र-ए-बे-मंज़रीहै
शहर-ए-बे-अक्सकाइकआईना-बरदारहूँमैं
डालकेसरकोगिरेबाँमेंलरज़उठताहूँ
मुट्ठी-भरख़ाकनहींएकसियहग़ारहूँमैं
देखशामिलहीनहींइसमेंकोईमेरेसिवा
देखकिसक़ाफ़िला-ए-ज़ातकासालारहूँमैं
बसयहीहैमिरेहोनेकाजवाज़औरसुराग़
इकहोनेसेमियाँबर-सर-ए-पैकारहूँमैं
  - Rafiq Raaz
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