ai hawa-e-dayaar-e-dard-o-malaal | ऐ हवा-ए-दयार-ए-दर्द-ओ-मलाल

  - Rafiq Raaz
हवा-ए-दयार-ए-दर्द-ओ-मलाल
मर्हबामर्हबातआलतआल
लफ़्ज़गुम-सुमहैंऔरइनमेंहैग़म
मेरीख़ामोशियोंकाजाह-ओ-जलाल
अक़्लसेकस्ब-ए-रौशनीकरके
मुल्क-ए-दिलहोगयाहैरू-ब-ज़वाल
तूभीउसमेंहैतेरीदुनियाभी
कितनागहराहैसोचकापाताल
पक्कीसड़कोंपेयादआताहै
कच्चेरस्तोंकासब्ज़ा-ए-पामाल
किसपेअबहैचिनारकासाया
ईंजीरानिना-ओ-कैफ़ल-हाल
खोलदीवान-ए-हाफ़िज़-ए-शीराज़
फ़ालतूअबरफ़ीक़-ए-राज़निकाल
  - Rafiq Raaz
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