kheench laai thii mujhe khushboo hi tere pairhan ki | खींच लाई थी मुझे ख़ुश्बू ही तेरे पैरहन की

  - Rafiq Raaz
खींचलाईथीमुझेख़ुश्बूहीतेरेपैरहनकी
परतिरीआँखोंमेंहैवहशतभीआहू-ए-ख़ुतनकी
इश्क़कीआतिशकहाँबारूदकेशो'लेहैंरक़्साँ
अबकहाँवोज़ुल्फ़औरवोदास्ताँदार-ओ-रसनकी
क्याहुएवोदिनकिजबअक्सरमुयस्सरथीमुझेभी
दिनकोज़ुल्मतज़ुल्फ़कीऔरधूपशबकोसीम-तनकी
आतिश-ए-फ़ुर्क़तसेमैंशबकोउजालामाँगताहूँइश्क़मेंहोतीनहींहैहदकोईदीवाने-पनकी
रौशनीजिसकीमिरीआँखोंकोख़ीराकरचुकीहै
राखकरकेछोड़देगीअबहरारतइसबदनकी
देखकेरस्तेकेमंज़रसबकेसबथेग़र्क़-ए-हैरत
यादऐसेमेंभलाआतीकिसेअपनेवतनकी
  - Rafiq Raaz
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