ghazab ki kaat thii ab ke hawa ke taano men | ग़ज़ब की काट थी अब के हवा के तानों में

  - Rafiq Raaz
ग़ज़बकीकाटथीअबकेहवाकेतानोंमें
शिगाफ़पड़गएहैंबे-ज़बाँचटानोंमें
हमारेहोंटहीपत्थरकेहैंवगरनामियाँ
हमएकआगलिएफिरतेहैंदहानोंमें
बगूलाबनकेउठातोमैंथाख़राबेसे
बपाहुआकोईहश्रआसमानोंमें
सियाहशहरकीक़िस्मतमेंमेराफ़ैज़कहाँ
चराग़-ए-नज़्रहूँजलताहूँआस्तानोंमें
टपकपड़ाहूँबिल-आख़िरमैंअपनीआँखोंसे
छुपारखाथामुझेतुमनेकिनख़ज़ानोंमें
सुकूतकोकभीकरसदासआलूदा
कियेज़बाँहैमुक़द्दस-तरींज़बानोंमें
सुख़न-शनासफ़सीलोंकाहैसुकूतग़ज़ब
सुख़न-तराज़हैंज़ंजीरेंक़ैद-ख़ानोंमें
  - Rafiq Raaz
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