jism deewaar hai deewaar men dar karna hai | जिस्म दीवार है दीवार में दर करना है

  - Rafiq Raaz
जिस्मदीवारहैदीवारमेंदरकरनाहै
रूहइकग़ारहैइसग़ारमेंघरकरनाहै
एकहीक़तरातोहैअश्क-ए-नदामतकाबहुत
कौनसेदश्त-ओ-बयाबानकोतरकरनाहै
जलतेरहनाभीहैदीवारपेफ़ानूसकेबिन
बे-ज़ेरहमार्का-ए-बादभीसरकरनाहै
ख़ाकहोजानेपेख़ाक-बसरक्यूँँहोब-ज़िद
क्यातुम्हेंदोश-ए-हवापरभीसफ़रकरनाहै
अबइनआँखोंमेंवोदरियाकहाँवोचश्मेंकहाँ
चंदक़तरेहैंजिन्हेंलाल-ओ-गुहरकरनाहै
फ़तह-ए-गुलज़ारमुबारकहोमगरयादरहे
अभीना-दीदाबयाबानभीसरकरनाहै
कुछतोहैरंगसाएहसासकेपर्देमेंनिहाँ
जिसकोमंज़रकीतरहवक़्फ़-ए-नज़रकरनाहै
गुल-ए-नौख़ेज़कोतेशाभीबनादेया-रब
संगगुल-ए-लब-बस्ताकेसीनेमेंअसरकरनाहै
एकनेज़ेपेलगानेहैंकईमेवा-ए-सर
एकटहनीकोसमर-दारशजरकरनाहै
  - Rafiq Raaz
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