bujha charaaghh hawaon ka saamna kar ke | बुझा चराग़ हवाओं का सामना कर के

  - Rafiq Raaz
बुझाचराग़हवाओंकासामनाकरके
बहुतउदासहुआहूँदरीचावाकरके
सुकूतटूटगयाऔररौशनीसीहुई
शरारसंगसेनिकलाख़ुदाख़ुदाकरके
खुलादिनकोकिसीइस्मसेवोआहनीदर
अबआओदेखतेहैंरातकोसदाकरके
उड़ूँगाख़ाकसापहले-पहलऔरआख़िर-ए-कार
हवा-ए-तुंदकोरखदूँगामैंसबाकरके
वोजिसकेबोझसेख़मभीथीहमारीकमर
हमआजआएहैंवोक़र्ज़भीअदाकरके
  - Rafiq Raaz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy