ai dil-e-zaar kahii neend na ho taari | ऐ दिल-ए-ज़ार कहीं नींद न हो तारी

  - Rafiq Raaz
दिल-ए-ज़ारकहींनींदहोतारी
चश्म-ए-दरवेशभीख़्वाबोंसेनहींआरी
जिस्मकादश्तभीसुनसानहैबरसोंसे
मुल्क-ए-दिलपरभीनहींरूहकीसरदारी
चाँदसेकमथीहमहिज्रकेमारोंको
उसशब-ए-तारमेंमौहूमसीचिंगारी
यक-ब-यककौनमिरीफ़िक्रमेंदरआया
नहर-ए-ख़ुश्बूसीबयाबाँमेंहुईजारी
राखकेढेरमेंशो'लाहैकोईरक़्साँ
मेरेअंदरहैअभीतककोईइंकारी
ज़ुल्फ़-ए-पेचाँतिरीज़ंजीरबनेगीकब
कबअमलमेंमिरीआएगीगिरफ़्तारी
  - Rafiq Raaz
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