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Jaun Elia
uske badan ko dii numood hamne sukhan men aur phir
uske badan ko dii numood hamne sukhan men aur phir | उसके बदन को दी नुमूद हमने सुखन में और फिर
- Jaun Elia
उसके
बदन
को
दी
नुमूद
हमने
सुखन
में
और
फिर
उसके
बदन
के
वास्ते
इक
क़बा़
भी
सी
गई
- Jaun Elia
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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तुमने
कैसे
उसके
जिस्म
की
ख़ुशबू
से
इनकार
किया
उस
पर
पानी
फेंक
के
देखो
कच्ची
मिट्टी
जैसा
है
Tehzeeb Hafi
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बदन
का
ज़िक्र
बातिल
है
तो
आओ
बिना
सर
पैर
की
बातें
करेंगे
Fahmi Badayuni
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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इश्क़
को
पूछता
नहीं
कोई
हुस्न
का
एहतिराम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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ग़रीबी
ओढ़ती
है
सिर
पे
चादर
अमीरी
जिस्म
ढकती
क्यूँ
नहीं
है
Mohd Arham
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हम
इन
आँखों
से
उसे
हर
रोज़
पढ़ते
आए
हैं
वो
बदन
तो
याद
है
दो
के
पहाड़े
की
तरह
Ankit Maurya
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कुछ
इस
सलीक़े
से
माथे
पे
उसने
होंट
रखे
बदन
को
छोड़
के
सारी
थकन
को
चूम
लिया
Harsh saxena
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जिस्म
चादर
सा
बिछ
गया
होगा
रूह
सिलवट
हटा
रही
होगी
Kumar Vishwas
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काम
की
बात
मैं
ने
की
ही
नहीं
ये
मिरा
तौर-ए-ज़िंदगी
ही
नहीं
ऐ
उमीद
ऐ
उमीद-ए-नौ-मैदां
मुझ
से
मय्यत
तिरी
उठी
ही
नहीं
मैं
जो
था
उस
गली
का
मस्त-ए-ख़िराम
उस
गली
में
मिरी
चली
ही
नहीं
ये
सुना
है
कि
मेरे
कूच
के
बा'द
उस
की
ख़ुश्बू
कहीं
बसी
ही
नहीं
थी
जो
इक
फ़ाख़्ता
उदास
उदास
सुब्ह
वो
शाख़
से
उड़ी
ही
नहीं
मुझ
में
अब
मेरा
जी
नहीं
लगता
और
सितम
ये
कि
मेरा
जी
ही
नहीं
वो
जो
रहती
थी
दिल-मोहल्ले
में
फिर
वो
लड़की
मुझे
मिली
ही
नहीं
जाइए
और
ख़ाक
उड़ाइए
आप
अब
वो
घर
क्या
कि
वो
गली
ही
नहीं
हाए
वो
शौक़
जो
नहीं
था
कभी
हाए
वो
ज़िंदगी
जो
थी
ही
नहीं
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Jaun Elia
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मुझ
से
अब
लोग
कम
ही
मिलते
हैं
यूँँ
भी
मैं
हट
गया
हूँ
मंज़र
से
Jaun Elia
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अभी
इक
शोर
सा
उठा
है
कहीं
कोई
ख़ामोश
हो
गया
है
कहीं
है
कुछ
ऐसा
कि
जैसे
ये
सब
कुछ
इस
से
पहले
भी
हो
चुका
है
कहीं
तुझ
को
क्या
हो
गया
कि
चीज़ों
को
कहीं
रखता
है
ढूँढता
है
कहीं
जो
यहाँ
से
कहीं
न
जाता
था
वो
यहाँ
से
चला
गया
है
कहीं
आज
शमशान
की
सी
बू
है
यहाँ
क्या
कोई
जिस्म
जल
रहा
है
कहीं
हम
किसी
के
नहीं
जहाँ
के
सिवा
ऐसी
वो
ख़ास
बात
क्या
है
कहीं
तू
मुझे
ढूँड
मैं
तुझे
ढूँडूँ
कोई
हम
में
से
रह
गया
है
कहीं
कितनी
वहशत
है
दरमियान-ए-हुजूम
जिस
को
देखो
गया
हुआ
है
कहीं
मैं
तो
अब
शहर
में
कहीं
भी
नहीं
क्या
मिरा
नाम
भी
लिखा
है
कहीं
इसी
कमरे
से
कोई
हो
के
विदाअ'
इसी
कमरे
में
छुप
गया
है
कहीं
मिल
के
हर
शख़्स
से
हुआ
महसूस
मुझ
से
ये
शख़्स
मिल
चुका
है
कहीं
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Jaun Elia
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हम
को
यारों
ने
याद
भी
न
रखा
'जौन'
यारों
के
यार
थे
हम
तो
Jaun Elia
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मैं
जो
हूँ
'जौन-एलिया'
हूँ
जनाब
इस
का
बेहद
लिहाज़
कीजिएगा
Jaun Elia
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