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Unknown
watan ki KHaak zaraa ediyaan ragadne de
watan ki KHaak zaraa ediyaan ragadne de | वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
- Unknown
वतन
की
ख़ाक
ज़रा
एड़ियाँ
रगड़ने
दे
मुझे
यक़ीन
है
पानी
यहीं
से
निकलेगा
- Unknown
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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लटकन
झटकन
ओढ़
मटकते
एक
परी
का
दिख
जाना,
प्लेन
गुजरने
पर
बचपन
के
ख़ुश
होने
सा
लगता
है!
बिन्दी,
लिपस्टिक,
चूड़ी,
कंगन
और
किनारा
साड़ी
का,
लाल
कलर
पर
कब्ज़ा
अय
हय
कितना
अच्छा
लगता
है!
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Atul K Rai
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ज़हर
खा
खा
कर
गुज़ारा
कर
रहे
हैं
आजकल
ज़िंदगी
तुझ
सेे
किनारा
कर
रहे
हैं
आजकल
तू
बहुत
ही
दिलनशीं
है,
महजबीं
है
तू
मगर
तुझको
अपनाकर
ख़सारा
कर
रहे
हैं
आजकल
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Hameed Sarwar Bahraichi
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ज़बाँ
हमारी
न
समझा
यहाँ
कोई
'मजरूह'
हम
अजनबी
की
तरह
अपने
ही
वतन
में
रहे
Majrooh Sultanpuri
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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पा
के
तूफ़ां
का
इशारा
दरिया
तोड़
देता
है
किनारा
दरिया
Abdul Mannan Tarzi
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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मुझे
अपना
किनारा
कम
था
'दानिश'
बढ़ा
ली
मैंने
फिर
गहराई
अपनी
Madan Mohan Danish
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लोग
काँटों
से
बच
के
चलते
हैं
मैं
ने
फूलों
से
ज़ख़्म
खाए
हैं
Unknown
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लजा
कर
शर्म
खा
कर
मुस्कुरा
कर
दिया
बोसा
मगर
मुँह
को
बना
कर
Unknown
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दुनिया
में
वही
शख़्स
है
ताज़ीम
के
क़ाबिल
जिस
शख़्स
ने
हालात
का
रुख़
मोड़
दिया
हो
Unknown
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मिलने
का
वा'दा
उन
के
तो
मुँह
से
निकल
गया
पूछी
जगह
जो
मैंने
कहा
हँस
के
ख़्वाब
में
Unknown
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या
रब
मिरी
दु'आओं
में
इतना
असर
रहे
फूलों
भरा
सदा
मिरी
बहना
का
घर
रहे
Unknown
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