क्याजानिएकिसबातपेमग़रूररहीहूँ
कहनेकोतोजिसराहचलायाहैचलीहूँ
तुमपासनहींहोतोअजबहालहैदिलका
यूँँजैसेमैंकुछरखकेकहींभूलगईहूँ
फूलोंकेकटोरोंसेछलकपड़तीहैशबनम
हँसनेकोतिरेपीछेभीसौबारहँसीहूँ
तेरेलिएतक़दीरमिरीजुम्बिश-ए-अबरू
औरमैंतिराईमा-ए-नज़रदेखरहीहूँ
सदियोंसेमिरेपाँवतलेजन्नत-ए-इंसाँ
मैंजन्नत-ए-इंसाँकापतापूछरहीहूँ
दिलकोतोयेकहतेहैंकिबसक़तरा-ए-ख़ूँहै
किसआसपेऐसंग-ए-सर-ए-राहचलीहूँ
जिसहाथकीतक़्दीसनेगुलशनकोसँवारा
उसहाथकीतक़दीरपेआज़ुर्दारहीहूँ
क़िस्मतकेखिलौनेहैंउजालाकिअँधेरा
दिलशो'ला-तलबथासोबहर-हालजलीहूँ