kya jaaniye kis baat pe maghroor rahi hooñ | क्या जानिए किस बात पे मग़रूर रही हूँ

  - Ada Jafarey
क्याजानिएकिसबातपेमग़रूररहीहूँ
कहनेकोतोजिसराहचलायाहैचलीहूँ
तुमपासनहींहोतोअजबहालहैदिलका
यूँँजैसेमैंकुछरखकेकहींभूलगईहूँ
फूलोंकेकटोरोंसेछलकपड़तीहैशबनम
हँसनेकोतिरेपीछेभीसौबारहँसीहूँ
तेरेलिएतक़दीरमिरीजुम्बिश-ए-अबरू
औरमैंतिराईमा-ए-नज़रदेखरहीहूँ
सदियोंसेमिरेपाँवतलेजन्नत-ए-इंसाँ
मैंजन्नत-ए-इंसाँकापतापूछरहीहूँ
दिलकोतोयेकहतेहैंकिबसक़तरा-ए-ख़ूँहै
किसआसपेसंग-ए-सर-ए-राहचलीहूँ
जिसहाथकीतक़्दीसनेगुलशनकोसँवारा
उसहाथकीतक़दीरपेआज़ुर्दारहीहूँ
क़िस्मतकेखिलौनेहैंउजालाकिअँधेरा
दिलशो'ला-तलबथासोबहर-हालजलीहूँ
  - Ada Jafarey
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