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Vikram Gaur Vairagi
main bhool chuka hooñ ki ye vanvaas hai zakan hai
main bhool chuka hooñ ki ye vanvaas hai zakan hai | मैं भूल चुका हूँ कि ये वनवास है वन है
- Vikram Gaur Vairagi
मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
- Vikram Gaur Vairagi
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वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त
बर्बाद
कर
के
छोड़ेगा
Divakar Rahi
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आज
भी
'प्रेम'
के
और
'कृष्ण'
के
अफ़्साने
हैं
आज
भी
वक़्त
की
जम्हूरी
ज़बाँ
है
उर्दू
Ata Abidi
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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सदा
ऐश
दौराँ
दिखाता
नहीं
गया
वक़्त
फिर
हाथ
आता
नहीं
Meer Hasan
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वक़्त
अपना
बुरा
चल
रहा
इसलिए
सब
सेे
अच्छी
है
मेरी
घडी
की
समझ
Neeraj Neer
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वक़्त
देता
था
वो
मिलने
का
तभी
रक्खी
थी
दोस्त
इक
दौर
था
मैंने
भी
घड़ी
रक्खी
थी
Nadir Ariz
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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बग़ैर
चश्में
के
जो
देख
भी
न
पाता
है
वो
बेवक़ूफ़
मुझे
देखना
सिखाता
है
अगर
ये
वक़्त
डुबोएगा
मेरी
नाव
को
तो
इस
सेे
कह
दो
मुझे
तैरना
भी
आता
है
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Vikram Gaur Vairagi
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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जहान
भर
में
न
हो
मुयस्सर
जो
कोई
शाना,
हमें
बताना
नहीं
मिले
गर
कोई
ठिकाना
तो
लौट
आना,
हमें
बताना
कुछ
ऐसी
बातें
जो
अनकही
हों,
मगर
वो
अंदर
से
खा
रही
हों
लगे
किसी
को
बताना
है
पर
नहीं
बताना,
हमें
बताना
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Vikram Gaur Vairagi
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सच
देखा
है
सच
क्या
है
सिर्फ़
नज़र
का
धोखा
है
खेल
तो
सारा
उसका
है
जिसने
पासा
फेंका
है
पीछे
चलने
वाले
ने
कुछ
आगे
का
सोचा
है
झूठ
ही
आख़िर
सच
निकले
ये
भी
तो
हो
सकता
है
तन्हा
क्यूँँ
रहते
हैं
आप
इतना
क्या
मन
लगता
है
तुमको
मोहब्बत
आती
थी
लड़ना
तुमने
सीखा
है
रौशनी
करनी
पड़ती
है
और
अँधेरा
होता
है
सब
कुछ
छोड़
रहे
हो
तुम
वैरागी
ये
सब
क्या
है
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Vikram Gaur Vairagi
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