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Azhar Nawaz
vo bhi aaKHir tiri taa'riif men hi kharch hua
vo bhi aaKHir tiri taa'riif men hi kharch hua | वो भी आख़िर तिरी ता'रीफ़ में ही ख़र्च हुआ
- Azhar Nawaz
वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
- Azhar Nawaz
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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वक़्त
के
पास
हैं
कुछ
तस्वीरें
कोई
डूबा
है
कि
उभरा
देखो
Baqi Siddiqui
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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उस
वक़्त
का
हिसाब
क्या
दूँ
जो
तेरे
बग़ैर
कट
गया
है
Ahmad Nadeem Qasmi
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वक़्त
देता
था
वो
मिलने
का
तभी
रक्खी
थी
दोस्त
इक
दौर
था
मैंने
भी
घड़ी
रक्खी
थी
Nadir Ariz
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तब
हम
दोनों
वक़्त
चुरा
कर
लाते
थे
अब
मिलते
हैं
जब
भी
फ़ुर्सत
होती
है
Javed Akhtar
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वक़्त
हर
ज़ख़्म
का
मरहम
तो
नहीं
बन
सकता
दर्द
कुछ
होते
हैं
ता-उम्र
रुलाने
वाले
Sada Ambalvi
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मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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बनता
था
दिन
तुम्हारा
कभी
देख
कर
मुझे
तुम
वक़्त
दे
रहे
हो
घड़ी
देख
कर
मुझे
Azhar Nawaz
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चारासाज़ो
मिरा
इलाज
करो
आज
कुछ
दर्द
में
कमी
सी
है
Azhar Nawaz
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ख़ूब-सूरत
है
सिर्फ़
बाहरस
ये
इमारत
भी
आदमी
सी
है
Azhar Nawaz
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दाग़
चेहरे
का
यूँँही
छोड़
दिया
जाता
है
आइना
ज़िद
में
मगर
तोड़
दिया
जाता
है
तेरी
शोहरत
के
पस-ए-पर्दा
मिरा
नाम
भी
है
तेरी
लग़्ज़िश
से
मुझे
जोड़
दिया
जाता
है
कोई
किरदार
अदा
करता
है
क़ीमत
इस
की
जब
कहानी
को
नया
मोड़
दिया
जाता
है
इक
तवाज़ुन
जो
बिगड़ता
है
कभी
रूह
के
साथ
शीशा-ए-जिस्म
वहीं
फोड़
दिया
जाता
है
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Azhar Nawaz
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फ़रेब
दे
के
उसे
जीतना
गवारा
नहीं
अगर
वो
दिल
से
हमारा
नहीं
हमारा
नहीं
Azhar Nawaz
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