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Tehzeeb Hafi
maine jo kuchh bhi socha hua hai main vo vaqt aane pe kar jaaunga
maine jo kuchh bhi socha hua hai main vo vaqt aane pe kar jaaunga | मैंने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा
- Tehzeeb Hafi
मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
- Tehzeeb Hafi
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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जो
ज़रा
ठीक
से
किरदार
निगारी
हो
जाए
ये
कहानी
तो
हक़ीक़त
पे
भी
तारी
हो
जाए
तेरे
हामी
है
सो
उठ
कर
भी
नहीं
जा
सकते
जाने
किस
वक़्त
यहाँ
राय-शुमारी
हो
जाए
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Khurram Afaq
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वक़्त
हर
ज़ख़्म
का
मरहम
तो
नहीं
बन
सकता
दर्द
कुछ
होते
हैं
ता-उम्र
रुलाने
वाले
Sada Ambalvi
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त
बर्बाद
कर
के
छोड़ेगा
Divakar Rahi
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जनम
दिन
पर
घड़ी
दी
थी
उन्होंने
हमें
उम्मीद
थी
वो
वक़्त
देंगे
Harsh saxena
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वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
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उस
ने
इस
तरह
से
बदला
है
रवय्या
अपना
पूछना
पड़ता
है
हर
वक़्त,
तुम्हीं
हो
ना
दोस्त?
Inaam Azmi
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था
इंतिज़ार
मनाएँगे
मिल
के
दीवाली
न
तुम
ही
लौट
के
आए
न
वक़्त-ए-शाम
हुआ
Aanis Moin
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तुझको
बतलाता
मगर
शर्म
बहुत
आती
है
तेरी
तस्वीर
से
जो
काम
लिया
जाता
है
Tehzeeb Hafi
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अगर
तू
मुझ
सेे
शर्माती
रहेगी
मुहब्बत
हाथ
से
जाती
रहेगी
Tehzeeb Hafi
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इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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क्या
ग़लत-फ़हमी
में
रह
जाने
का
सदमा
कुछ
नहीं
वो
मुझे
समझा
तो
सकता
था
कि
ऐसा
कुछ
नहीं
इश्क़
से
बच
कर
भी
बंदा
कुछ
नहीं
होता
मगर
ये
भी
सच
है
इश्क़
में
बंदे
का
बचता
कुछ
नहीं
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Tehzeeb Hafi
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इस
लिए
रौशनी
में
ठंडक
है
कुछ
चराग़ों
को
नम
किया
गया
है
Tehzeeb Hafi
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