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Khurram Afaq
jo zaraa theek se kirdaar nigaari ho jaa.e
jo zaraa theek se kirdaar nigaari ho jaa.e | जो ज़रा ठीक से किरदार निगारी हो जाए
- Khurram Afaq
जो
ज़रा
ठीक
से
किरदार
निगारी
हो
जाए
ये
कहानी
तो
हक़ीक़त
पे
भी
तारी
हो
जाए
तेरे
हामी
है
सो
उठ
कर
भी
नहीं
जा
सकते
जाने
किस
वक़्त
यहाँ
राय-शुमारी
हो
जाए
- Khurram Afaq
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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हमको
हकीम
ने
ही
किया
ठीक
दोस्तों
हम
पर
किसी
के
लम्स
ने
जादू
नहीं
किया
Tanoj Dadhich
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जब
राह
झूठ
की
चुनी
तो
लिफ़्ट
भी
मिली
और
सच
की
राह
में
मिले
पैरों
के
बस
निशाँ
Tanoj Dadhich
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परवरदिगार
आपके
सब
फैसले
अजीब
हैं
जो
तंग
था
वो
तंग
है
जो
ठीक
था
वो
मर
गया
Adnan Raza
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मेरे
सीने
में
नहीं
तो
तेरे
सीने
में
सही
हो
कहीं
भी
आग
लेकिन
आग
जलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
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कुछ
तो
मिल
जाए
लब-ए-शीरीं
से
ज़हर
खाने
की
इजाज़त
ही
सही
Arzoo Lakhnavi
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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हम
तो
समझे
थे
मोहब्बत
की
लड़ाई
साहब
आप
तलवार
उठा
लाए
हैं
भाई
साहब
धूप
तालाब
का
हुलिया
तो
बदल
सकती
है
इतनी
आसानी
से
छुटती
नहीं
काई
साहब
ख़ाक
को
ख़ाक
पे
धरने
का
मज़ा
अपना
है
हिज्र
में
कौन
बिछाता
है
चटाई
साहब
फिर
भी
आवारगी
ज़ाएअ
नहीं
जाने
वाली
कोई
भी
चीज़
अगर
हाथ
न
आई
साहब
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Khurram Afaq
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जब
हम
मुट्ठी
खोलेंगे
नई
कहानी
खोलेंगे
ज़ख़्म
की
इज़्ज़त
करते
हैं
देर
से
पट्टी
खोलेंगे
चेहरा
पढ़ने
वाले
चोर
गठरी
थोड़ी
खोलेंगे
दिल
का
वहम
निकालेंगे
गले
की
डोरी
खोलेंगे
वो
ख़ुद
थोड़ी
आएगा
नौकर
कुंडी
खोलेंगे
ज़ोर
से
गाँठ
लगाई
थी
दाँत
से
रस्सी
खोलेंगे
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Khurram Afaq
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ये
सितारा
भी
डूब
सकता
है
दिल
तुम्हारा
भी
डूब
सकता
है
साथ
रखो
बचाने
वालों
को
वो
दोबारा
भी
डूब
सकता
है
डूब
सकता
है
वो
अगर
आधा
फिर
तो
सारा
भी
डूब
सकता
है
अपनी
कश्ती
तो
इस
भँवर
में
है
जिस
में
धारा
भी
डूब
सकता
है
जो
बचाता
है
डूबने
वाले
वो
इदारा
भी
डूब
सकता
है
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Khurram Afaq
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अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
असासो
के
नए
हक़दार
पैदा
हो
रहे
हैं
वसीयत
इसलिए
जल्दी
लिखी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
सवाली
इसलिए
चुप
चाप
रुख़्सत
हो
रहे
हैं
तेरी
सूरत
बा-आसानी
पढ़ी
जाने
लगी
है
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Khurram Afaq
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ज़ख़्म
की
इज़्ज़त
करते
हैं
देर
से
पट्टी
खोलेंगे
चेहरा
पढ़ने
वाले
चोर
गठरी
थोड़ी
खोलेंगे
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Khurram Afaq
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