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Baqi Siddiqui
vaqt ke paas hain kuchh tasveerein
vaqt ke paas hain kuchh tasveerein | वक़्त के पास हैं कुछ तस्वीरें
- Baqi Siddiqui
वक़्त
के
पास
हैं
कुछ
तस्वीरें
कोई
डूबा
है
कि
उभरा
देखो
- Baqi Siddiqui
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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तब
हम
दोनों
वक़्त
चुरा
कर
लाते
थे
अब
मिलते
हैं
जब
भी
फ़ुर्सत
होती
है
Javed Akhtar
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जनम
दिन
पर
घड़ी
दी
थी
उन्होंने
हमें
उम्मीद
थी
वो
वक़्त
देंगे
Harsh saxena
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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कुछ
कहने
का
वक़्त
नहीं
ये
कुछ
न
कहो
ख़ामोश
रहो
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
हाँ
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
Ibn E Insha
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आँख
से
दूर
न
हो
दिल
से
उतर
जाएगा
वक़्त
का
क्या
है
गुज़रता
है
गुज़र
जाएगा
Ahmad Faraz
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तुम्हारे
साथ
इतना
ख़ूब-सूरत
वक़्त
गुज़रा
है
तुम्हारे
बाद
हाथों
में
घड़ी
अच्छी
नहीं
लगती
Madhyam Saxena
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मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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तुम
भी
उल्टी
उल्टी
बातें
पूछते
हो
हम
भी
कैसी
कैसी
क़स
में
खाते
हैं
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Baqi Siddiqui
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दाग़-ए-दिल
हम
को
याद
आने
लगे
लोग
अपने
दिए
जलाने
लगे
कुछ
न
पा
कर
भी
मुतमइन
हैं
हम
इश्क़
में
हाथ
क्या
ख़ज़ाने
लगे
यही
रस्ता
है
अब
यही
मंज़िल
अब
यहीं
दिल
किसी
बहाने
लगे
ख़ुद-फ़रेबी
सी
ख़ुद-फ़रेबी
है
पास
के
ढोल
भी
सुहाने
लगे
अब
तो
होता
है
हर
क़दम
पे
गुमाँ
हम
ये
कैसा
क़दम
उठाने
लगे
इस
बदलते
हुए
ज़माने
में
तेरे
क़िस्से
भी
कुछ
पुराने
लगे
रुख़
बदलने
लगा
फ़साने
का
लोग
महफ़िल
से
उठ
के
जाने
लगे
एक
पल
में
वहाँ
से
हम
उट्ठे
बैठने
में
जहाँ
ज़माने
लगे
अपनी
क़िस्मत
से
है
मफ़र
किस
को
तीर
पर
उड़
के
भी
निशाने
लगे
हम
तक
आए
न
आए
मौसम-ए-गुल
कुछ
परिंदे
तो
चहचहाने
लगे
शाम
का
वक़्त
हो
गया
'बाक़ी'
बस्तियों
से
शरार
आने
लगे
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Baqi Siddiqui
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हर
नए
हादसे
पे
हैरानी
पहले
होती
थी
अब
नहीं
होती
Baqi Siddiqui
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तुम
ज़माने
की
राह
से
आए
वर्ना
सीधा
था
रास्ता
दिल
का
Baqi Siddiqui
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