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Ahmad Faraz
aankh se door na ho dil se utar jaayega
aankh se door na ho dil se utar jaayega | आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
- Ahmad Faraz
आँख
से
दूर
न
हो
दिल
से
उतर
जाएगा
वक़्त
का
क्या
है
गुज़रता
है
गुज़र
जाएगा
- Ahmad Faraz
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मैंने
बस
इतना
पूछा
था
क्या
देखते
हो
भला
मैंने
ये
कब
कहा
था
मुझे
देखना
छोड़
दो
गीली
मिट्टी
की
ख़ुशबू
मुझे
सोने
देती
नहीं
मेरे
बालों
में
तुम
उँगलियाँ
फेरना
छोड़
दो
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Tajdeed Qaiser
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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तेरी
तस्वीर
हट
जाएगी
लेकिन
नज़र
दीवार
पर
जाती
रहेगी
Tehzeeb Hafi
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शाम
थी
हिज्र
की
हाल
मत
पूछना
आँख
थकने
लगे
तो
जिगर
रो
पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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ले
दे
के
अपने
पास
फ़क़त
इक
नज़र
तो
है
क्यूँँ
देखें
ज़िंदगी
को
किसी
की
नज़र
से
हम
Sahir Ludhianvi
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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देर
तक
आँख
मुसीबत
में
पड़ी
रहती
है
तुम
चले
जाते
हो,
तस्वीर
बनी
रहती
है
Fauziya Rabab
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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तुम
तकल्लुफ़
को
भी
इख़्लास
समझते
हो
'फ़राज़'
दोस्त
होता
नहीं
हर
हाथ
मिलाने
वाला
Ahmad Faraz
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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क्यूँँ
तबीअत
कहीं
ठहरती
नहीं
दोस्ती
तो
उदास
करती
नहीं
हम
हमेशा
के
सैर-चश्म
सही
तुझ
को
देखें
तो
आँख
भरती
नहीं
शब-ए-हिज्राँ
भी
रोज़-ए-बद
की
तरह
कट
तो
जाती
है
पर
गुज़रती
नहीं
ये
मोहब्बत
है,
सुन,
ज़माने,
सुन!
इतनी
आसानियों
से
मरती
नहीं
जिस
तरह
तुम
गुजारते
हो
फ़राज़
ज़िन्दगी
उस
तरह
गुज़रती
नहीं
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Ahmad Faraz
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न
तुझ
को
मात
हुई
है
न
मुझ
को
मात
हुई
सो
अबके
दोनों
ही
चालें
बदल
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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न
मंज़िलों
को
न
हम
रहगुज़र
को
देखते
हैं
अजब
सफ़र
है
कि
बस
हम-सफ़र
को
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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