gulon ko choo ke shameem-e-dua nahin aayi | गुलों को छू के शमीम-ए-दुआ नहीं आई

  - Ada Jafarey
गुलोंकोछूकेशमीम-ए-दुआनहींआई
खुलाहुआथादरीचासबानहींआई
हवा-ए-दश्तअभीतोजुनूँकामौसमथा
कहाँथेहमतिरीआवाज़-ए-पानहींआई
अभीसहीफ़ा-ए-जाँपररक़मभीक्याहोगा
अभीतोयादभीबे-साख़्तानहींआई
हमइतनीदूरकहाँथेकिफिरपलटसकें
सवाद-ए-शहरसकोईसदानहींआई
सुनाहैदिलभीनगरथारसाबसाभीथा
जलातोआँचभीअहल-ए-वफ़ानहींआई
जानेक़ाफ़िलेगुज़रेकिहैक़यामअभी
अभीचराग़बुझानेहवानहींआई
बसएकबारमनायाथाजश्न-ए-महरूमी
फिरइसकेबा'दकोईइब्तिलानहींआई
हथेलियोंकेगुलाबोंसेख़ूनरिसतारहा
मगरवोशोख़ी-ए-रंग-ए-हिनानहींआई
ग़यूरदिलसेमाँगीगईमुराद'अदा'
बरसनेआपहीकालीघटानहींआई
  - Ada Jafarey
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