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Ada Jafarey
haath kaanton se kar li.e zakhmi
haath kaanton se kar li.e zakhmi | हाथ काँटों से कर लिए ज़ख़्मी
- Ada Jafarey
हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
- Ada Jafarey
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है
ये
कैसा
सितम
मौला
ये
हैं
दुश्वारियाँ
कैसी
जहाँ
पर
रोना
था
हमको
वहीं
पर
मुस्कुराना
है
Aqib khan
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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यूँँ
न
क़ातिल
को
जब
यक़ीं
आया
हम
ने
दिल
खोल
कर
दिखाई
चोट
Fani Badayuni
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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आ
देख
कि
मेरे
आँसुओं
में
ये
किस
का
जमाल
आ
गया
है
Ada Jafarey
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एक
आईना
रू-ब-रू
है
अभी
उस
की
ख़ुश्बू
से
गुफ़्तुगू
है
अभी
वही
ख़ाना-ब-दोश
उम्मीदें
वही
बे-सब्र
दिल
की
ख़ू
है
अभी
दिल
के
गुंजान
रास्तों
पे
कहीं
तेरी
आवाज़
और
तू
है
अभी
ज़िंदगी
की
तरह
ख़िराज-तलब
कोई
दरमाँदा
आरज़ू
है
अभी
बोलते
हैं
दिलों
के
सन्नाटे
शोर
सा
ये
जो
चार-सू
है
अभी
ज़र्द
पत्तों
को
ले
गई
है
हवा
शाख़
में
शिद्दत-ए-नुमू
है
अभी
वर्ना
इंसान
मर
गया
होता
कोई
बे-नाम
जुस्तुजू
है
अभी
हम-सफ़र
भी
हैं
रहगुज़र
भी
है
ये
मुसाफ़िर
ही
कू-ब-कू
है
अभी
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Ada Jafarey
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मैं
आँधियों
के
पास
तलाश-ए-सबा
में
हूँ
तुम
मुझ
से
पूछते
हो
मिरा
हौसला
है
क्या
Ada Jafarey
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दीप
था
या
तारा
क्या
जाने
दिल
में
क्यूँँ
डूबा
क्या
जाने
गुल
पर
क्या
कुछ
बीत
गई
है
अलबेला
झोंका
क्या
जाने
आस
की
मैली
चादर
ओढ़े
वो
भी
था
मुझ
सा
क्या
जाने
रीत
भी
अपनी
रुत
भी
अपनी
दिल
रस्म-ए-दुनिया
क्या
जाने
उँगली
थाम
के
चलने
वाला
नगरी
का
रस्ता
क्या
जाने
कितने
मोड़
अभी
बाक़ी
हैं
तुम
जानो
साया
क्या
जाने
कौन
खिलौना
टूट
गया
है
बालक
बे-परवा
क्या
जाने
ममता
ओट
दहकते
सूरज
आँखों
का
तारा
क्या
जाने
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Ada Jafarey
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आख़िरी
टीस
आज़माने
को
जी
तो
चाहा
था
मुस्कुराने
को
याद
इतनी
भी
सख़्त-जाँ
तो
नहीं
इक
घरौंदा
रहा
है
ढाने
को
संग-रेज़ो
में
ढल
गए
आँसू
लोग
हँसते
रहे
दिखाने
को
ज़ख़्म-ए-नग़्मा
भी
लौ
तो
देता
है
इक
दिया
रह
गया
जलाने
को
जलने
वाले
तो
जल
बुझे
आख़िर
कौन
देता
ख़बर
ज़माने
को
कितने
मजबूर
हो
गए
होंगे
अन-कही
बात
मुँह
पे
लाने
को
खुल
के
हँसना
तो
सब
को
आता
है
लोग
तरसे
हैं
इक
बहाने
को
रेज़ा
रेज़ा
बिखर
गया
इंसाँ
दिल
की
वीरानियाँ
जताने
को
हसरतों
की
पनाह-गाहों
में
क्या
ठिकाने
हैं
सर
छुपाने
को
हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
आस
की
बात
हो
कि
साँस
'अदा'
ये
खिलौने
थे
टूट
जाने
को
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Ada Jafarey
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