dard-o-gham zamaane ke aur ek jee tanhaa | दर्द-ओ-ग़म ज़माने के और एक जी तन्हा

  - Rafiq Khawar Jaskani
दर्द-ओ-ग़मज़मानेकेऔरएकजीतन्हा
आँधियोंमेंजलतीहैशम-ए-ज़िंदगीतन्हा
अपनीअपनीराहेंहैंअपनीअपनीमंज़िलहै
कार-गाह-ए-हस्तीमेंरहतेहैंसभीतन्हा
शबसेदाग़-ए-हिज्राँकावास्ताअजबशयहै
तेरीदिलकशीतन्हामेरीबेकलीतन्हा
हाएउसज़मानेमेंअहल-ए-फ़नकीबे-क़दरी
मौसम-ए-ज़मिस्ताँमेंजैसेचाँदनीतन्हा
जानेदिलकीधड़कनमेंक्याफ़रेबहोताहै
तुझसेबातकरतेहैंहमकभीकभीतन्हा
रहगुज़रपेसजतीहैअपनीबज़्म-ए-तन्हाई
तेरीनक़्श-ए-पातन्हामेरीबे-ख़ुदीतन्हा
हुस्न-ओ-इश्क़कीतक़दीरइकतज़ादबाहमहै
उनकीशामभीमहफ़िलअपनीसुब्हभीतन्हा
कौनकिसकीसुनताहैऐसेदौरमें'ख़ावर'
हमनेदूरछेड़ीहैग़मकीरागनीतन्हा
  - Rafiq Khawar Jaskani
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