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Kaviraj " Madhukar"
badle mausam haalaat yahaañ
badle mausam haalaat yahaañ | बदले मौसम हालात यहाँ
- Kaviraj " Madhukar"
बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
- Kaviraj " Madhukar"
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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हमारा
पेट
भर
भी
जाए
तब
भी
माँ
हमारी
हमें
दो
चार
रोटी
तो
ज़ियादा
ही
खिलाती
Kaviraj " Madhukar"
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समझो
मेरी
जान
बहुत
है
नफ़रत
से
नुक़सान
बहुत
है
जीना
मुश्किल
हो
सकता
है
मरना
तो
आसान
बहुत
है
तुम
जो
मेरी
ख़ातिर
करते
सच
में
मेरी
जान
बहुत
है
वो
ही
बेहद
मुश्किल
होता
लगता
जो
आसान
बहुत
है
शैतानी
दुनिया
की
ख़ातिर
हम
सेा
इक
इंसान
बहुत
है
हम
तो
अब
भी
सच
कहते
हैं
हम
में
अब
भी
जान
बहुत
है
मन
से
उसको
पढ़कर
देखो
वो
लड़की
आसान
बहुत
है
इस
में
कुछ
भी
ख़ास
नहीं
है
ये
दुनिया
बेजान
बहुत
है
जीना
सीखो
मेरेे
भाई
मरने
से
नुक़सान
बहुत
है
वो
तुमपे
मरती
है
मधुकर
जिस
सेे
तू
अंजान
बहुत
है
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Kaviraj " Madhukar"
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करूँँ
कैसे
तुम्हारे
बिन
गुज़ारा
मैं
तुम्हारा
हो
चुका
हूँ
बस
तुम्हारा
मैं
न
जाने
अब
तुम्हें
किसका
सहारा
है
कि
कल
तक
तो
तुम्हारा
था
सहारा
मैं
कि
तुम
सेे
कम
नहीं
हूँ
यार
मैं
भी
हाँ
अगर
हो
चाँद
तुम
तो
हूँ
सितारा
मैं
तुम्हारा
हो
चुका
हूँ
इक
दफ़ा
पहले
तुम्हारा
हो
रहा
हूँ
अब
दुबारा
मैं
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Kaviraj " Madhukar"
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उल्टा
सीधा
कम
लिखते
हैं
बस
उस
पर
ही
हम
लिखते
हैं
तुमको
अपना
लगता
हैं
पर
हम
तो
अपना
ग़म
लिखते
हैं
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Kaviraj " Madhukar"
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कि
अब
तक
तो
तुम्हारे
साथ
होना
चाहिए
था
मगर
देखो
अभी
भी
हम
अकेले
फिर
रहे
हैं
Kaviraj " Madhukar"
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