manzil bhi milegi raaste men tum raahguzar ki baat karo | मंज़िल भी मिलेगी रस्ते में तुम राहगुज़र की बात करो

  - Parvez Shahidi
मंज़िलभीमिलेगीरस्तेमेंतुमराहगुज़रकीबातकरो
आग़ाज़-ए-सफ़रसेपहलेक्यूँँअंजाम-ए-सफ़रकीबातकरो
ज़ालिमनेलियाहैशर्माकरफिरगोशा-ए-दामाँचुटकीमें
हैवक़्तकितुमबेबाकीसेअबदीदा-ए-तरकीबातकरो
आयाहैचमनमेंमौसम-ए-गुलआईहैंहवाएँज़िंदाँतक
दीवारकीबातेंहोलेंगीइसवक़्ततोदरकीबातकरो
हैतेज़हवाहिलताहैक़फ़सख़तरेमेंपड़ीहैहरतीली
फ़रियाद-ए-असीरीबंदकरोअबजुम्बिश-ए-परकीबातकरो
क्यूँँदार-ओ-रसनकेसाएमेंमंसूरकीबातेंकरतेहो
रखनाहैजोऊँचासरअपनातोअपनेहीसरकीबातकरो
क्यूँँअहल-ए-जुनूँअर्बाब-ए-ख़िरदकीमहफ़िलमेंख़ामोशरहें
वोअपनेहुनरकीबातकरेंतुमअपनेहुनरकीबातकरो
क्याबरबत-ओ-दफ़दमतोड़चुकेमौतगईक्याहरनग़्मेंको
तुममुतरिब-ए-जाम-ओ-मीनाहोक्यूँँतेग़सिपरकीबातकरो
  - Parvez Shahidi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy