jalte rahna kaam hai dil ka bujh jaane se haasil kya | जलते रहना काम है दिल का बुझ जाने से हासिल क्या

  - Parvez Shahidi
जलतेरहनाकामहैदिलकाबुझजानेसेहासिलक्या
अपनीआगकेईंधनहैंहमईंधनकामुस्तक़बिलक्या
बोलोनुक़ूश-ए-पाकुछबोलोतुमतोशायदसुनतेहो
भागरहीहैराहगुज़रकेकानमेंकहकरमंज़िलक्या
डूबनेवालो!देखरहेहोतुमतोकश्तीकेतख़्ते
देखोदेखोग़ौरसेदेखोदौड़रहाहैसाहिलक्या
अन-पढ़आँधीघुसपड़तीहैतोड़केफाटकमहलोंके
''अंदरआनामनअहै''लिखकरलटकानेसेहासिलक्या
क़त्ल-ए-वक़ार-ए-इश्क़कामुजरिमजहल-ए-हवस-काराँहीनहीं
नंगेइसहम्माममेंसबहैंआलिमक्याऔरजाहिलक्या
परवानेअबअपनीअपनीआगमेंजलतेरहतेहैं
शोलोंकेबटवारेसेथामक़्सद-ए-शम्-ए-महफ़िलक्या
टूटीधनककेटुकड़ेलेकरबादलरोतेफिरतेहैं
खींचा-तानीमेंरंगोंकीसूरजभीहैशामिलक्या
  - Parvez Shahidi
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