suna hai un ke lab par kal tha zikr-e-mukhtasar meraa | सुना है उन के लब पर कल था ज़िक्र-ए-मुख़्तसर मेरा

  - Parvez Shahidi
सुनाहैउनकेलबपरकलथाज़िक्र-ए-मुख़्तसरमेरा
तसव्वुरदेरहाहैतूलइसीकोकिसक़दरमेरा
येदिल-सोज़ी-ए-दर्द-ए-आदमिय्यतक्याक़यामतहै
किसीकीआँखसेआँसूबहेंदामनहोतरमेरा
तसव्वुरमय-कदेकामुश्तरकहोकिसतरहनासेह?
ख़िरदसाग़र-शिकनतेरीजुनूँपैमाना-गरमेरा
यहीआलमरहागरशौक़कीआईना-बंदीका!
तोगुमहोजाएगाजल्वोंमेंशौक़-ए-ख़ुद-निगरमेरा
ख़ुदा-राकुछतोनाज़-ए-सर-बुलंदीरहमकरमुझपर
तिरेबार-ए-गिराँसेअबझुकाजाताहैसरमेरा
उलझकररहगईथीअक़्लतोपर्देकेतारोंमें
बड़ीमुश्किलसेकामआयाजुनून-ए-पर्दा-दरमेरा
नहीं'परवेज़'कुछअपनेहीअश्कोंकीनमीइसमें
बनाहैआस्तीन-ए-दोस्ताँदामान-ए-तरमेरा
  - Parvez Shahidi
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