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Dipendra Singh 'Raaz'
udaasi ka sabab usse jo ham tab pooch lete
udaasi ka sabab usse jo ham tab pooch lete | उदासी का सबब उस सेे जो हम तब पूछ लेते
- Dipendra Singh 'Raaz'
उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
- Dipendra Singh 'Raaz'
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वो
जिसकी
याद
ने
जीना
मुहाल
कर
रखा
है
उसी
की
आस
ने
मुझको
सँभाल
कर
रखा
है
सियाह
रातों
में
साए
से
बातें
करता
है
तुम्हारे
ग़म
ने
नया
रोग
पाल
कर
रखा
है
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Harsh saxena
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जीना
मुश्किल
है
के
आसान,
ज़रा
देख
तो
लो
लोग
लगते
हैं
परेशान,
ज़रा
देख
तो
लो
इन
चराग़ों
के
तले
ऐसे
अँधेरे
क्यूँँ
हैं?
तुम
भी
रह
जाओगे
हैरान,
ज़रा
देख
तो
लो
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Javed Akhtar
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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ये
तुम
सब
मिल
के
जो
कुछ
कह
रहे
हो
मैं
कह
सकता
हूँ
पर
कहना
नहीं
है
हमारा
शे'र
भी
सुनने
न
आएँ
हमारा
दुख
जिन्हें
सहना
नहीं
है
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Ali Zaryoun
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इस
कदर
मत
उदास
हो
जैसे
ये
मोहब्बत
का
आख़िरी
दिन
है
Idris Babar
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अब
ये
सोचा
है
बस
ख़ुश
रहेंगे
दिल
उदासी
से
उकता
गया
है
Sapna Moolchandani
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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ना-मुकम्मल
फिर
हुई
मेरी
ग़ज़ल
शे'र
फिर
तन्हा
हुआ,
मेरी
तरह
Dipendra Singh 'Raaz'
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क्या
कहा
के
याद
करना
छोड़
दूँ
अब
मैं
तुम्हें
साफ़
ही
कह
दो
के
जीना
छोड़
दो
अब
'राज़'
तुम
Dipendra Singh 'Raaz'
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इज़्ज़त-ओ-आबरू
के
डर
से
फिर
इक
वालिद
ने
अपनी
बेटी
की
मोहब्बत
का
गला
घोंट
दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
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हिज्र
के
मौसम
में
और
क्या
काम
है
रोज़
पलकों
को
भिगोने
के
सिवा
पूछ
बैठी
एक
दिन
फिर
वो
मुझे
और
कुछ
आता
है
रोने
के
सिवा
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Dipendra Singh 'Raaz'
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क्या
फ़ाइदा
है
इसका
बुझा
दो
इसे
ख़ुदा
फ़िरदौस
में
जो
दीप
उजाला
न
कर
सका
Dipendra Singh 'Raaz'
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