saagar-e-sifaali ko jaam-e-jam banaya hai | साग़र-ए-सिफ़ालीं को जाम-ए-जम बनाया है

  - Parvez Shahidi
साग़र-ए-सिफ़ालींकोजाम-ए-जमबनायाहै
फैलकरमिरेदिलने''मैं''को''हम''बनायाहै
हम-सफ़रबनायाहैहम-क़दमबनायाहै
वक़्तनेमुझेकितनामोहतरमबनायाहै
नाज़हैख़लीलीकोहुस्न-ए-नक़्श-ए-सानीपर
गरचेआज़रीहीनेयेसनमबनायाहै
बे-कसी-ए-दिलअपनीदूरकीहैयूँँमैंने
दूसरोंकेग़मकोभीअपनाग़मबनायाहै
ज़िंदगीकीमौसीक़ीक्याहैहमसमझतेहैं
साज़केतलव्वुनकोज़ेर-ओ-बमबनायाहै
ज़ुल्फ़कीतरहइसकोबससँवारतेरहिए
ज़िंदगीकोफ़ितरतनेख़म-ब-ख़मबनायाहै
मैंनेज़र्रेज़र्रेकोमुस्कुराहटेंदीहैं
तुमनेहरसितारेकोचश्म-ए-नमबनायाहै
मुद्दई-ए-जिद्दतहैतेरीफ़िक्रज़ाहिद!
मय-कदेकीईंटोंसेक्यूँँइरमबनायाहै
बुतहज़ारोंतोड़ेहैंकितनेटुकड़ेजोड़ेहैं
ज़िंदगीनेजबजाकरइकसनमबनायाहै
  - Parvez Shahidi
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