fasurda hai ilm harf-ha-e-kitaab bhi bujh ke rah ga.e hain | फ़सुर्दा है इल्म हर्फ़-हा-ए-किताब भी बुझ के रह गए हैं

  - Parvez Shahidi
फ़सुर्दाहैइल्महर्फ़-हा-ए-किताबभीबुझकेरहगएहैं
हैराखहीराखमदरसोंमेंनिसाबभीबुझकेरहगएहैं
दिलोंमेंशोलेसिसकरहेहैंजमीहुईबर्फ़हैलबोंपर
सवालभीबुझकेरहगएहैंजवाबभीबुझकेरहगएहैं
नहींहैमहफ़िलमेंकोईगर्मीहुएहैंदिलसर्दमुतरीबोंके
धुआँनिकलताहैउँगलियोंसेरुबाबभीबुझकेरहगएहैं
चराग़-ए-साग़रसेलौलगाकरपायाकुछभीफ़सुर्दगीने
किग़मतोयेहैकिशोला-हा-ए-शराबभीबुझकेरहगएहैं
गिरफ़्त-ए-तूफ़ाँमेंगयाहैख़यालकाशोला-पोशदामन
रहेहक़ीक़तहीजिनसेरौशनवोख़्वाबभीबुझकेरहगएहैं
बुझाबुझासाहैक़ल्ब-ए-सहराबुझीबुझीसीहैरेग-ए-ताबाँ
फ़रेबखाएगीतिश्नगीक्यासराबभीबुझकेरहगएहैं
हैमुन्फ़इलज़ौक़-ए-शोला-चीनीअरक़अरक़हैजबीन-ए-ख़िर्मन
कहाँसेआएँगेबर्क़-पारेसहाबभीबुझकेरहगएहैं
  - Parvez Shahidi
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