zindagi ne fasl-e-gul ko bhi pashemaan kar diya | ज़िंदगी ने फ़स्ल-ए-गुल को भी पशेमाँ कर दिया

  - Parvez Shahidi
ज़िंदगीनेफ़स्ल-ए-गुलकोभीपशेमाँकरदिया
जिसबयाबाँपरनज़रडालीगुलिस्ताँकरदिया
तूनेयेक्यासुकूत-ए-शिकवा-सामाँकरदिया
दिलकीदिलहीमेंरहीउनकोपशेमाँकरदिया
शुक्रियामौसम-ए-गुलपास-ए-वहशतहैयही
गुल्सिताँकोतूनेहम-दीवार-ए-ज़िंदाँकरदिया
कितनेअफ़्सानेबनाकररखलिएथेशौक़ने
यूँँनक़ाबउल्टीहक़ीक़तनेकिहैराँकरदिया
किसक़दरमज़बूतनिकलेतेरेदीवानेकेहाथ
शाम-ए-ग़मकोजबनिचोड़ासुब्ह-ए-ताबाँकरदिया
फूलबरसाएहैंक्याक्यातेग़-ए-ख़ूँ-आशामने
तुमनेशहर-ए-गुल-अज़ाराँकोगुलिस्ताँकरदिया
सीना-ए-सनअतमेंभरकरअपनेदिलकाइज़्तिराब
आहन-ओ-फ़ौलादकोमैंनेग़ज़ल-ख़्वाँकरदिया
  - Parvez Shahidi
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