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Harsh saxena
yahii soch kar KHud pe ham naaz karte
yahii soch kar KHud pe ham naaz karte | यही सोच कर ख़ुद पे हम नाज़ करते
- Harsh saxena
यही
सोच
कर
ख़ुद
पे
हम
नाज़
करते
कि
हम
उनकी
पहली
मुहब्बत
रहे
हैं
- Harsh saxena
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मुँह
फेर
कर
वो
कहते
हैं
बस
मान
जाइए
इस
शर्म
इस
लिहाज़
के
क़ुर्बान
जाइए
Bekhud Dehelvi
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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धौल-धप्पा
उस
सरापा
नाज़
का
शेवा
नहीं
हम
ही
कर
बैठे
थे
‘ग़ालिब’
पेश-दस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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परतव
से
जिस
के
आलम-ए-इम्काँ
बहार
है
वो
नौ-बहार-ए-नाज़
अभी
रहगुज़र
में
है
Ali Sardar Jafri
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लजा
कर
शर्म
खा
कर
मुस्कुरा
कर
दिया
बोसा
मगर
मुँह
को
बना
कर
Unknown
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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है
राम
के
वजूद
पे
हिन्दोस्ताँ
को
नाज़
अहल-ए-नज़र
समझते
हैं
उस
को
इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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कोर्ट
में
तारीख़
के
ये
सिलसिले
चलते
रहे
और
वो
लड़की
वहाँँ
पर
शर्म
से
ही
मर
गई
Sunny Seher
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काबा
किस
मुँह
से
जाओगे
'ग़ालिब'
शर्म
तुम
को
मगर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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पहले
तो
मेरी
याद
से
आई
हया
उन्हें
फिर
आइने
में
चूम
लिया
अपने-आप
को
Shakeb Jalali
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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दिल
तुम्हारा
भी
किसी
से
लगे
तो
तुम
जानो
किस
तरह
हँसते
हुए
ज़हर
पिया
जाता
है
Harsh saxena
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मुसलसल
उसकी
सूरत
देखनी
है
हमें
आँखों
की
हिम्मत
देखनी
है
तुम्हें
मतलब
ही
क्या
दिल
से
हमारे
तुम्हें
तो
सिर्फ़
दौलत
देखनी
है
बदन
भी
साथ
लेकर
आइएगा
अगर
मेरी
शराफ़त
देखनी
है
वो
जो
क़िस्मत
हमारी
लिख
रहा
है
उसे
भी
पहले
मेहनत
देखनी
है
हथेली
पर
तू
मेरा
नाम
लिख
ले
मुझे
मेहंदी
की
रंगत
देखनी
है
मुझे
ख़ुद
से
घटाकर
देख
लेना
तुझे
गर
अपनी
क़ीमत
देखनी
है
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Harsh saxena
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हथेली
पर
तू
मेरा
नाम
लिख
ले
मुझे
मेहंदी
की
रंगत
देखनी
है
Harsh saxena
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हम
चाह
कर
भी
टूटते
हैं
हर
दफ़ा
होता
यही
है
इश्क़
का
क्या
क़ायदा
हर
वक़्त
तुम
यूँँ
याद
आते
हो
मुझे
जैसे
नई
दुल्हन
करे
मिस
मायका
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Harsh saxena
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