but-gari-e-jamaal men guzra | बुत-गरी-ए-जमाल में गुज़रा

  - Parvez Shahidi
बुत-गरी-ए-जमालमेंगुज़रा
अहद-ए-कुफ़्रएकहालमेंगुज़रा
वक़्तगुज़राजोबे-ख़यालीमें
वोतिरेहीख़यालमेंगुज़रा
कुछकटावक़्तरंज-ए-दूरीमें
कुछख़याल-ए-विसालमेंगुज़रा
हाएवोज़ख़्मजिनकामौसम-ए-गुल
दहशत-ए-इंदिमालमेंगुज़रा
फिरधड़कनेलगाहैदिलअपना
क्याकहूँक्याख़यालमेंगुज़रा
निगह-ए-दोस्तकाभीमौसम-ए-लुत्फ़
दिलहीकीदेख-भालमेंगुज़रा
एकलम्हेमेंकितनेसालकटे
एकलम्हाभीसालमेंगुज़रा
  - Parvez Shahidi
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