main bhatkata hi raha dasht-e-shanaasaai men | मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में

  - Anis shah anis
मैंभटकताहीरहादश्त-ए-शनासाईमें
कोईउतराहीनहींरूहकीगहराईमें
क्यामिलायाहैबताजाम-ए-पज़ीराईमें
ख़ूबनश्शाहैतेरीहौसला-अफ़जाईमें
तेरीयादोंकीसुई,प्रेमकाधागामेरा
कामआएहैंबहुतज़ख़्मोंकीतुरपाईमें
डसरहीहैयेसियह-रातकीनागिनमुझको
भररहीज़हर-ए-ख़मोशी,रग-ए-तन्हाईमें
सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेबआँखोंमेंजबसेहैलगा
तबसेहैख़ूबइज़ाफ़ाहद-ए-बीनाईमें
फ़िक्र-ओ-फ़न,रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल,ग़ज़लकीख़ुशबू
बसलगारहताहूँमैंक़ाफ़िया-पैमाईमें
सीखपानीसेहुनरकाम'अनीस'आएगा
दौड़करख़ुदहीचलाआताहैगहराईमें
  - Anis shah anis
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