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Alankrat Srivastava
na teerth ja kar na dharm grantho ka saar pa kar
na teerth ja kar na dharm grantho ka saar pa kar | न तीर्थ जा कर न धर्म ग्रंथो का सार पा कर
- Alankrat Srivastava
न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
- Alankrat Srivastava
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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कितने
हसीं
हो
माशा-अल्लाह
तुम
पे
मोहब्बत
ख़ूब
जचेगी
Zubair Ali Tabish
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हम
ऐसे
सुनते
हैं
उसकी
बातों
को
जैसे
कोई
सूफ़ी
गाने
सुनता
है
Tanoj Dadhich
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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अल्लाह
बना
दे
मिरे
अश्कों
को
कबूतर
सब
पूछ
रहे
हैं
तिरे
रूमाल
में
क्या
है
Khan Janbaz
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घी
मिस्री
भी
भेज
कभी
अख़बारों
में
कई
दिनों
से
चाय
है
कड़वी
या
अल्लाह
Nida Fazli
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'मीर'
के
दीन-ओ-मज़हब
को
अब
पूछते
क्या
हो
उन
ने
तो
क़श्क़ा
खींचा
दैर
में
बैठा
कब
का
तर्क
इस्लाम
किया
Meer Taqi Meer
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तेरा
रुख़-ए-मुख़त्तत
क़ुरआन
है
हमारा
बोसा
भी
लें
तो
क्या
है
ईमान
है
हमारा
Meer Taqi Meer
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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मुझ
से
कहा
जिब्रील-ए-जुनूँ
ने
ये
भी
वही-ए-इलाही
है
मज़हब
तो
बस
मज़हब-ए-दिल
है
बाक़ी
सब
गुमराही
है
Majrooh Sultanpuri
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ये
लगता
है
कि
सरकारें
बदलने
से
मिलेगा
कुछ
हाँ
लगता
है,
मगर
ऐसा
यहाँ
पर
यार
नइँ
होता
Alankrat Srivastava
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लिख
रहा
हूँ
मैं
ऐसी
ग़ज़ल
दोस्तों
सुन
जिसे
जाए
वो
भी
पिघल
दोस्तों
ज़िंदगी
जिस
सहारे
मैं
जीता
गया
याद
उसको
भी
हैं
क्या
वो
पल
दोस्तों
कर
तो
लेता
मुहब्बत
दुबारा
मगर
है
नहीं
कोई
उसका
बदल
दोस्तों
एक
दूजे
में
उलझे
हुए
हम
ही
हैं
एक
दूजे
की
उलझन
का
हल
दोस्तों
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Alankrat Srivastava
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अगर
उसको
शिकायत
है
तो
ये
तय
है
मुहब्बत
है
बड़ी
अच्छी
है
सुनने
में
मगर
झूठी
कहावत
है
Alankrat Srivastava
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हमें
पूछो
कठिन
कितना
किसी
का
दिल
चुराना
है
उन्हें
क्या
है
उन्हें
तो
बस
ज़रा
का
मुस्कुराना
है
Alankrat Srivastava
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बस
ज़रा
देर
को
बाग़
में
बैठी
वो
पेड़
पौधे
भी
ग़ज़लें
सुनाने
लगे
फूल
भी
ख़ास
भाते
न
थे
हमको
पर
साथ
तुम
थी
तो
काँटें
सुहाने
लगे
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Alankrat Srivastava
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